तैयारी | सरकार बताएगी विधायी एजेंडा, नीट-यूजी और राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में घेरने की तैयारी में विपक्ष
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से हो रही है। सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले 19 जुलाई को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। संसद के प्रत्येक सत्र से पहले आयोजित होने वाली इस बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देगी, जबकि विपक्षी दल उन मुद्दों को सामने रखेंगे जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाना चाहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार का विधायी एजेंडा इस बार काफी व्यापक है और सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं, हाल के हफ्तों में कुछ विपक्षी दलों में सामने आए मतभेद और विभाजन के कारण सत्र के हंगामेदार रहने के भी आसार हैं।
विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल देखने को मिली है। पार्टी के 20 सांसदों ने नेशनल सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है। इसके अलावा, पार्टी के तीन सांसदों ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है। शिवसेना (यूबीटी) में भी विभाजन हुआ है। लोकसभा में पार्टी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। वहीं, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सात सांसद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से नीट-यूजी पेपर लीक का मामला और ऑपरेशन सिंदूर में हुई हताहतों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणियों का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस ने इस संबंध में रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा था कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक बुलाने को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा था कि इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।
अब पीएम-सीएम भी 30 दिन जेल में रहे तो जाएगी कुर्सी
संसद में एक नया कानून बनाने की तैयारी जारी है। 130वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय समिति ने जांच के बाद अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस विधेयक को सीएम, मंत्री की कुर्सी छीनने वाला विधेयक भी कहा जा रहा है। इस विधेयक के मुताबिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर किसी मामले में गिरफ्तार होने के बाद 30 दिनों तक जेल में रहते हैं तो उन्हें अपने आप पद से हटाने का प्रावधान है। विपक्ष के विरोध के बाद इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया था। जेपीसी ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में 5 मुख्य सिफारिशें की हैं। पहली सिफारिश में कहा गया कि अगर कोई केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, या दिल्ली/जम्मू-कश्मीर/पुडुचेरी का मंत्री गंभीर अपराध (जिसमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है) में गिरफ्तार होता है और लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे अपना पद छोड़ना ही पड़ेगा। जेल में 30 दिन पूरा होने के अगले दिन यानी 31वें दिन तक प्रधानमंत्री (केंद्र के मंत्री के मामले में) या मुख्यमंत्री (राज्य के मंत्री के मामले में) को राष्ट्रपति या राज्यपाल को सलाह देनी होगी कि इस मंत्री को हटा दो। अगर पीएम और सीएम ये सलाह नहीं देते, तो 31वें दिन खुद-ब-खुद वह मंत्री अपने पद से हट गया माना जाएगा।













