सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे के कथित गबन की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का सोमवार को निर्देश दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति बी. मोहना की पीठ ने राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया।
तीन याचिकाकर्ताओं में से एक नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। उन्होंने राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया। अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने भी इसी प्रकार के अनुरोधों वाली दूसरी याचिका दायर की है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर तीसरी याचिका में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच के साथ-साथ ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने एक याचिकाकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए बाद में उल्लेख करने की अनुमति दी थी। अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य कथित अवैधताओं की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाना चाहिए। याचिका में राय ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को ऐसे नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र स्थापित एवं लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है, जो जनहित की रक्षा कर सकें और करोड़ों श्रद्धालुओं तथा दानदाताओं का विश्वास बनाए रखें। याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट से जुड़े धन के गायब होने और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें अंततः सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन रिपोर्टों ने अयोध्या की गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए पीढ़ियों तक संघर्ष करने वाले लोगों में गहरी चिंता पैदा की है।
आठों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 27 तक बढ़ी
राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी के मामले में जेल में निरुद्ध सभी आठों आरोपियों की सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विशेष न्यायालय एंटी करप्शन कोर्ट में पेशी हुई। प्रभारी न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट प्रतिभा नारायण ने सभी आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा रिमांड को 27 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है। इसके पहले मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में चढ़ावा चोरी के विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा के अवकाश पर होने के कारण प्रार्थना पत्र प्रभारी न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट प्रतिभा नारायण के समक्ष पेश किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जेल में निरुद्ध आठों आरोपियों को प्रभारी न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। न्यायाधीश ने सभी आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा रिमांड की अवधि 14 दिन और बढ़ा दी।
गौवध रोकने के आदेश पर उच्चतम न्यायालय की रोक
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि राज्य में किसी गाय या बछड़े का वध न हो। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की ओर से 27 मई के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के 27 मई के आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि बकरीद की पूर्व संध्या 28 मई को या किसी अन्य दिन राज्य में किसी गाय या बछड़े का वध न होने दिया जाए। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, हम इस रिट याचिका को स्वीकार करते हैं और तमिलनाडु राज्य को निर्देश देते हैं कि वह सुनिश्चित करे कि बकरीद की पूर्व संध्या या किसी अन्य दिन किसी गाय या बछड़े का वध न हो। राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि उच्च न्यायालय का यह आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है। इस अधिनियम के तहत 10 वर्ष से अधिक उम्र वाली ऐसी गायों का वध करने की अनुमति है जो काम करने या प्रजनन के लिए अयोग्य हों। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाना आवश्यक है।












