नई दिल्ली। यह पांच साल पहले की बात है जब अजिंक्य रहाणे ऑस्ट्रेलिया में कई स्टार खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण कमजोर पड़ी भारतीय टीम को टेस्ट श्रृंखला में अप्रत्याशित टेस्ट जीत दिलाने के बाद मुंबई में अपनी आवासीय सोसायटी में लौटे, तो उनके पड़ोसियों ने कंगारू के आकार के टॉपिंग वाले केक से उनका स्वागत किया। रहाणे ने उसे एक नज़र देखा और केक के ऊपर से टॉपिंग हटाने के बाद ही उसे काटने के लिए राजी हुए। कंगारू ऑस्ट्रेलियाई गौरव का प्रतीक है और अपनी जीत के बावजूद वह प्रतिद्वंदी टीम के राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान नहीं करना चाहते थे। इस घटना से उस व्यक्ति के चरित्र का पता चलता है जिन्होंने शांत रहकर पूरी ईमानदारी और साहस के साथ अपना काम किया। 38 वर्ष के रहाणे ने 85 टेस्ट मैचों में 12 शतकों सहित 5000 से अधिक रन बनाए। उन्होंने भारत की तरफ से अपना अंतिम मैच दो साल पहले खेला था और अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया।
इससे हालांकि एक सवाल अब भी जवाब की तलाश में है कि क्या रहाणे अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे या भारतीय क्रिकेट ने उन्हें कम आंका? अपने करियर में अधिकतर समय रहाणे भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज खिलाड़ियों विराट कोहली और रोहित शर्मा के साए में खेलते रहे जिससे भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान पर ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई।
इसके बावजूद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में नियमित कप्तान कोहली की अनुपस्थिति और कुछ खिलाड़ियों के चोटिल हो जाने के बाद साबित किया कि वह एक कुशल और प्रेरणादायी कप्तान हैं। उन्होंने तब न सिर्फ कप्तान बल्कि एक बल्लेबाज के रूप में भी अच्छा प्रदर्शन करके भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। लेकिन सभी शांत स्वभाव वाले खिलाड़ियों की तरह रहाणे ने कभी कोई शिकायत नहीं की जबकि उन्हें लंबे समय तक कप्तान नहीं रखा गया था। उन्होंने संकट के समय बखूबी टीम की कमान संभाली और दिखाया कि वह ड्रेसिंग रूम को शांत बनाए रखकर अपने काम को अंजाम देने में माहिर हैं। उन्होंने कैमरे के सामने कभी दिखावटी भावनाएं नहीं दिखाईं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला जीतने के बाद उनके चेहरे पर संतुष्ट स्पष्ट नजर आ रही थी।













