सरकार मूल्य आधारित बाघ संरक्षण के लिए प्रयासरत : सीएम
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस अवसर पर वन विभाग द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीएम कहा कि राज्य में बाघों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाघ संरक्षण कार्य किया जा रहा है। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक नई पंचसूत्री योजना तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार मूल्य आधारित बाघ संरक्षण के लिए प्रयासरत है। इस अवसर पर मंत्री गणेश नाईक, राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर, राज्यमंत्री एड. आशिष जयसवाल, विधायक सुमित वानखेड़े उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य में बाघ संरक्षण का कार्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चल रहा है क्योंकि बाघ का संरक्षण, जो प्राकृतिक आवास और खाद्य श्रृंखला के केंद्र में है, पर्यावरण और जंगलों की रक्षा करता है। राज्य के 6 बाघ अभ्यारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों को विस्थापित किया गया है और नए बफर क्षेत्र बनाए गए हैं। वन विभाग की नई नीति के चलते बाघ अभ्यारण्यों के निकट रहने वाले ग्रामीणों ने पुनर्वस और विस्थापन की पहल की है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को समाप्त करने के लिए, बाघ अभ्यारण्य के निकट स्थित गांवों में एक सुनियोजित दृष्टिकोण विकसित किया गया है। बाघों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए कैमरा ट्रैकिंग, एआई-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आदि जैसे उपाय किए गए हैं। इससे बाघ संरक्षण, जैव विविधता और पर्यटन के लिए एक नया पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है। परिणामस्वरूप, राज्य में बाघों की संख्या 2014 में 190 से बढ़कर 444 हो गई है और नई बाघ जनगणना से पता चलेगा कि यह संख्या 600 से अधिक हो गई है। विश्व की 75 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में है और महाराष्ट्र भारत में बाघों की संख्या के मामले में तीसरे स्थान पर है। पिछले दो दशकों में बाघ संरक्षण के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के कारण, महाराष्ट्र बाघों की आबादी के मामले में देश का पहला राज्य बनने की ओर अग्रसर है।
बाघों के अस्तित्व के महत्व को समझते हुए और इसे मानव जीवन और अस्तित्व के साथ समन्वित करते हुए, सरकार मूल्य-आधारित बाघ संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है। बाघ संरक्षण के लिए पाँच सिद्धांत तैयार किए गए हैं: मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, बाघ आवास हरित आजीविका अभियान को लागू करना, बाघ संरक्षण के लिए सीएसआर निधि उपलब्ध कराने हेतु सीएसआर नीति तैयार करना, सतत पर्यटन नीति बनाकर रोजगार सृजन करना और पर्यटन को बढ़ावा देते हुए वन संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराना। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रवीण परदेशी, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्रीनिवास राव के साथ कंबोडिया, भूटान और बांग्लादेश के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।











