राकांपा का उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर की गई टिप्पणी के खिलाफ प्रदर्शन
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल द्वारा राकांपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर दिए आपत्तिजनक और अपमानजनक बयान का निषेध करते हुए बुधवार को सीतार्बडी के वैरायटी चौक पर आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया गया।
यह आंदोलन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता राजेंद्र जैन के मार्गदर्शन में शहर अध्यक्ष अनिल अहिरकर के नेतृत्व में और शहर कार्यकारी अध्यक्ष श्रीकांत शिवणकर द्वारा आयोजित किया गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान बेहद अनोखा और आक्रामक तरीका अपनाया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तीन बंदरों की प्रतिकृति पर बुरा मत बोलो का संदेश और कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल का चेहरा चस्पा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे के जोरदार नारे लगाए।
आंदोलन की बढ़ती आक्रामकता और कार्यकर्ताओं के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हस्तक्षेप किया। आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस मुख्य आयोजक और कार्यकारी अध्यक्ष श्रीकांत शिवणकर को हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन ले गई। फिर भी कार्यकर्ताओं का विरोध जारी रहा। इस अवसर पर पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग महाराष्ट्र की सभ्य राजनीतिक परंपरा के अनुरूप नहीं है। सुनेत्रा पवार ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपना स्वतंत्र अस्तित्व स्थापित किया है। कांग्रेस ने विकास के मुद्दों पर कुछ कहने को न होने के कारण ही इस प्रकार की निम्न स्तर की व्यक्तिगत आलोचना का सहारा लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महिलाओं की गरिमा और सामाजिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए हमेशा दृढ़ रहेगी।
आंदोलन में अनिल अहिरकर, राजाभाऊ टाकसाले, श्रीकांत शिवणकर, प्रशांत पवार, आभा पांडे, बजरंगसिंह परिहार, तानाजी वनवे, राजेश माटे, दिलीप पनकुले, रमेश फुले, जानबा मस्के, सुनीता येरने, विशाल खांडेकर, माधुरी पालीवाल, नूतन रेवतकर, मनोज सांगोले, ब्रह्मानंद मस्के, राजेश शुक्ला, दिनेश रोडगे, मुकेश रेवतकर, संदीप सावरकर, खिजूर अली, राजू मिश्रा, मोंटी गंडेचा, राजेश समर्थ, नितिन डेंगे, राजेश फुle, राजू नागुलकर, बंटी मुल्ला, श्वेता डोमकुंडवार, राहुल कांबले, डॉ. मैंद, विश्वास पक्कीडे, जगदीश पंचबुदे, मनीषा साहू, बीरू सिंह, भूषण हरडे, मुमताज बाजी, शहाजा बाजी, कनिजा बेगम, गोविंदराव सोमकुंवर, योगेश चिवंडे, मनीष मसर्राम, अमरपालसिंह राजपूत, यशस्वी बंसोड़, अंजुम शेख, निसार अली, सत्यम सोडगीर, विवेक वानखेड़े, भोला पटेल, कुलवंतसिंह भामरा, रूपाली पिचकाटे, प्रवीण पाटिल, अमित पिचकाटे, सुनील विभुते, श्यामबिहारी पांडे, कपिल नारनवरे, तुषार ढबाले, विश्वास सेलसुरकर, राहुल आमदरे, मिलिंद जगताप, रमेश कांबले, नामदेव देशकर, कमलेश कोटावर, दुर्वेष खड़से सहित सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।










