कुणबी प्रमाणपत्र रद्द किए जाने को लेकर मनोज जरांगे की चेतावनी
अंतरवाली सराटी। मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण को लेकर फिर से आक्रमक रुख अपनाया है। मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी से आरक्षण देने की मांग के बाद कुछ लोगों को मिले कुणबी प्रमाणपत्र रद्द किए जाने की बात सामने आई है। मराठवाड़ा में कुल 4 नगरसेवकों के सीधे जाति प्रमाणपत्र रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन इस फैसले को लेकर मनोज जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित सत्ताधारी नेताओं पर हमला बोला है। अब देवेंद्र फडणवीस साहब, दिमाग की हवा निकाल दें, नहीं तो राज्य में घूमना मुश्किल हो जाएगा, ऐसी चेतावनी ही मनोज जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री फडणवीस को दी है। मनोज जरांगे ने अंतरवाली सराटी से मीडिया से बातचीत करते हुए सत्ताधारियों की जमकर आलोचना की। मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, प्रसाद लाड क्या करेंगे? वे मर-मर कर करते हैं। इन्होंने नुकसान करने का फैसला कर लिया है। उदय सामंत और लाड को तीन बार कहने के बाद भी नहीं होता क्योंकि वे उनकी बात नहीं सुनते।
फडणवीस अपने दिमाग की हवा बाहर निकाल दें। एक बार आंदोलन शुरू हो गया तो महाराष्ट्र में घूमना मुश्किल हो जाएगा। आपके नेता हमारे खिलाफ भाषण दे रहे हैं। बैठकें कर रहे हैं। आप उन्हें उपनेता बना रहे हैं। इतना पागल मत बनिए। आपको हमारा एक भी वोट नहीं मिलेगा। मैंने आशीष शेलार को बताया कि क्या हो रहा है? अतुल सावे भी इसमें हैं, यह मैंने बताया।मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूं। क्या मैंने छगन भुजबल या धनंजय मुंडे का नाम लिया? नहीं लिया। बाकी लोगों का ले रहा हूं। बावनकुले की वजह से भाजपा का नुकसान होगा। हमें भुगतना न पड़े, ऐसी चेतावनी मनोज जरांगे ने दी। मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि, मंत्री राधाकृष्ण विखे को इसमें से कुछ भी पता नहीं है। फर्जी क्या है, यह भी पता नहीं है। आरक्षण का कोई मेल नहीं है। आप उपसमिति के अध्यक्ष हैं। बावनकुले कर सकते हैं, आप भी कर सकते हैं। आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर चला गया है, क्या वह फर्जी नहीं है? केवल मराठों तक ही अपनी अकल मत चाइए। अपने घर के लोग हैं इसलिए उन्हें पैरों तले मत रौंदिए। 1994 में दिया गया 16 प्रतिशत आरक्षण फर्जी है या नहीं, यह देखना चाहिए। सच में उपजातियां ओबीसी की थीं या नहीं, यह देखिए। मराठे अपने हैं इसलिए उनका नुकसान करना बंद करें। यह पहले चलता था।
बावनकुले ने जरांगे के आरोपों को बताया गलत
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में राजनीतिक कारणों से कई जाति प्रमाणपत्र रद्द किए जा रहे हैं। वहीं, राज्य के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इस तरह का हस्तक्षेप संभव नहीं है। जरांगे ने मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर जालना जिले के अंतरवाली सराटी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार कई कुणबी (ओबीसी) प्रमाणपत्र रद्द करके मराठा आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले मराठा समुदाय के लोगों को कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने में सुविधा दी और बाद में एक सुनियोजित रणनीति के तहत उन्हें रद्द किया जाना सुनिश्चित किया। उनका दावा था कि इसका निशाना मराठा समुदाय के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।
जरांगे ने यह भी आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन का विरोध करने वाले लोग मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच बना चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि राजस्व मंत्री बावनकुले ने अधिकारियों को प्रमाणपत्र रद्द करने के निर्देश दिए और इस प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक पत्राचार को मंजूरी दी।
दस्तावेज पूरे न होने के कारण उन्हें रद्द किया जाता है : फडणवीस
■ मनोज जरांगे पाटिल के आरोपों के बाद फडणवीस ने कहा, उन्होंने ठीक-ठीक क्या कहा, यह मैंने नहीं सुना। लेकिन मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि जब प्रमाणपत्र जाति सत्यापन समिति के पास जाता है, तब समिति सर्वोच्च न्यायालय के अधीन काम करती है। इसमें राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। वे अदालत के आदेश के अनुसार काम करते हैं। कितने प्रमाणपत्र रद्द हुए, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। लेकिन बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रमाणपत्र आते हैं, जिनमें से 10 से 12 प्रतिशत रद्द हो जाते हैं। गैर-कुणबी प्रमाणपत्र भी रद्द होते हैं। दस्तावेज पूरे न होने के कारण उन्हें रद्द किया जाता है। जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया था कि बावनकुले के आदेश के बाद कुणबी प्रमाणपत्र रद्द किए गए। इस पर फडणवीस ने कहा, “कोई भी जानबूझकर ऐसा नहीं करता। लेकिन यदि किसी को इस पर आपत्ति है, तो उसकी जांच की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी इसकी जांच करेंगे। यह देखा जाएगा कि सही प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं। इसमें अपील भी की जा सकती है। हम सत्ता में हैं, लेकिन भाजपा के कई नगरसेवकों और जिला परिषद समिति सदस्यों के प्रमाणपत्र भी रद्द हुए हैं। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। वे अदालत के आदेश के अनुसार काम कर रहे हैं। कोई भी मंत्री ऐसा नहीं करेगा। मैं फिर कहता हूं, यदि किसी को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह अपील कर सकता है। समिति ने जिन कमियों की ओर इशारा किया है, उन्हें पूरा किया जा सकता है।”













