युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे : पीएम मोदी
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोट्स बनाए जाएंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नीट पेपर लीक मामले के मद्देनजर केंद्र सरकार नए पब्लिक एगामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024 के तहत कार्रवाई तेज करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ रोजाना सुनवाई करने के लिए चार राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं के लिए यह संदेश ऐसे समय आया है, जब तीन दिन पहले कॉक्रोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद चलो मार्च निकाला था। इस मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे बड़ी संख्या में छात्र घायल हो गए। वहीं, विरोध मार्च को रोकने की कोशिश के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए सरकार ने त्वरित अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है। मोदी ने कहा, हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है।
जवाब नाकाफी है, प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ेंगे : कॉजपा
कॉजपा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग को फिर से दोहराते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा में जवाबदेही के मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई है। प्रधानमंत्री के ‘एक्स’ पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधान की एक तस्वीर साझा की जिस पर लिखा था, मेरा नाम कुछ नहीं है। वहीं, कॉजपा ने पोस्ट किया, धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। कॉजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह लगभग डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शनों के बाद आई और बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के पीछे के मुख्य सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, हम यह जगह नहीं छोड़ेंगे। रांका ने कहा, यहां बड़ी संख्या में लोग पूरे जोश और पक्के इरादे के साथ मौजूद हैं और हर कोई उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यह मुद्दा अब सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह गया है। रांका ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़ गया है और अब केंद्र का नेतृत्व भी निशाने पर हैं। उन्होंने कहा, अब लोगों का ध्यान प्रधानमंत्री की ओर जा रहा है। अगर आप यहां लगाए जा रहे नारों को सुनें तो पाएंगे कि लोगों का गुस्सा लगातार इस बात को लेकर बढ़ रहा है कि प्रधानमंत्री उनकी बात क्यों नहीं सुन रहे हैं। सरकार को यह समझना चाहिए क्योंकि अब लोगों ने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछना शुरू कर दिया है।











