जमीन मालिकों को बड़ी राहत, राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की मंगलवार 11 अगस्त को बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। भू-अधिग्रहण के बाद मुआवजा देने में देरी होने पर मालिक को मिलने वाली ब्याज की दर में सुधार करने का निर्णय राज्य मंत्रिमंडल ने लिया है। साथ ही सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जमीन के लेन-देन का खर्च कम करने से लेकर कृषि विभाग में नए पद, चीनी मिल को कर्ज, कौशल विश्वविद्यालयों के नियमों में बदलाव और हदगांव में जिला न्यायालय जैसे कई निर्णयों पर मंत्रिमंडल की बैठक में मुहर लगाई गई। सरकार किसी परियोजना के लिए किसान या जमीन मालिक की जमीन लेती है। जमीन जाने के बाद मुआवजे के पैसे समय पर नहीं मिले, तो संबंधित व्यक्ति को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में मुआवजा देरी से दिए जाने पर उसकी ब्याज दर में सुधार किया जाएगा। इसके लिए 2013 के भू-अधिग्रहण कानून की धारा 72 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। यानी, सरकार द्वारा जमीन लेने के बाद उसके पैसे देने में देरी हुई, तो उस देरी की अवधि के लिए जमीन मालिक को मिलने वाले ब्याज से संबंधित नियम बदलेंगे। अक्सर सड़क, रेलवे, सिंचाई और अन्य बड़ी परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर भू-अधिग्रहण किया जाता है। इसलिए इस निर्णय का सीधा लाभ जमीन देने वाले किसानों और जमीन मालिकों को हो सकता है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करते समय बड़े पैमाने पर जमीन की आवश्यकता होती है। ऐसी परियोजनाओं के लिए बनाई गई संबंधित कंपनियों में जमीन एक कंपनी से दूसरी कंपनी को देते समय लगने वाले स्टांप शुल्क को माफ करने का निर्णय लिया गया है। किसी निश्चित परियोजना को स्थापित करने के लिए अलग कंपनी बनाई जाती है। ऐसी कंपनी को एसपीवी कहा जाता है। अब ऐसी संबंधित कंपनियों में जमीन देते समय स्टांप शुल्क नहीं भरना पड़ेगा। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए खरीदी गई जमीन का हस्तांतरण करते समय लगने वाले शुल्क में 25 प्रतिशत छूट दी जाएगी। संक्षेप में, सौर, पवन और अन्य ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करते समय जमीन के लेन-देन पर होने वाले खर्च को कम करने का सरकार का प्रयास है।
समाजकार्य को एक स्वतंत्र विषय के रूप में शुरू किया जा सकेगा
वरिष्ठ महाविद्यालयों में समाजकार्य को एक स्वतंत्र विषय के रूप में शुरू किया जा सकेगा। नया पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त कक्षाएं भी शुरू की जा सकेंगी। पहले से समाजकार्य की शिक्षा देने वाले महाविद्यालयों को भी नए पाठ्यक्रम और अतिरिक्त कक्षाएं शुरू करने की अनुमति होगी। हालांकि इन पाठ्यक्रमों को सरकारी अनुदान के बिना चलाना होगा। इससे समाजकार्य की शिक्षा लेना चाहने वाले विद्यार्थियों के लिए और अधिक पाठ्यक्रम और सीटें उपलब्ध होने की संभावना है।
पदों-कार्यालय के लिए होने वाले खर्च को मंजूरी
नांदेड जिले के हदगांव में जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायालय शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ सरकारी वकील का कार्यालय भी शुरू होगा। इसके लिए आवश्यक न्यायाधीशों और अन्य कर्मचारियों के पदों तथा कार्यालय चलाने के लिए होने वाले खर्च को मंजूरी दी गई है। इससे हदगांव और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को न्यायसंगत काम के लिए दूसरी जगह जाने की आवश्यकता कम होने की संभावना है।
किसानों की जमीन और खेती से संबंधित जानकारी को डिजिटल तरीके से एकत्रित करने के लिए एग्रीस्टैक की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इस काम को अधिक व्यवस्थित करने के लिए कृषि विभाग में चार नए पद बनाने को मंजूरी दी गई है। इनमें कृषि निदेशक, दो कृषि सह निदेशक और अपर निदेशक के पद होंगे। खेती के आंकड़े, सूचना-प्रौद्योगिकी, विभाग की संपत्ति और एग्रीस्टैक से संबंधित काम इन अधिकारियों द्वारा देखे जाएंगे। सरल भाषा में कहें तो, किसानों की जानकारी डिजिटल रूप में जमा करने का काम बढ़ रहा है, इसलिए इसके लिए कृषि विभाग में स्वतंत्र अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
नीलकंठेस्वर किसान सहकारी चीनी मिल के बारे में क्या निर्णय
लातुर जिले के औसा तालुका के किल्लारी स्थित श्री नीलकंठेस्वर किसान सहकारी चीनी मिल को राष्ट्रीय सहकार विकास निगम यानी एनसीडीसी से कर्ज लेने की सरकार ने मंजूरी दी है। मिल को बड़े खर्चों और रोजमर्रा का कामकाज चलाने के लिए पैसों की जरूरत है। इसके लिए 18 करोड़ 9 हजार रुपये के कर्ज का प्रस्ताव एनसीडीसी को भेजा जाएगा। बड़ी मशीनरी और मिल से संबंधित स्थायी कामों के लिए लगने वाला पैसा तथा रोजमर्रा का काम चलाने के लिए लगने वाला पैसा, इन दोनों जरूरतों के लिए यह कर्ज लिया जाएगा।
कौशल विकास व उद्यमिता विभाग
अपने पैसों से निजी कौशल विश्वविद्यालय शुरू करने वालों के लिए बनाए गए नियमों में भी बदलाव होंगे। कौशल विकास और उद्यमिता विभाग की मार्गदर्शक सूचनाओं में सुधार करने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इससे कौशल आधारित शिक्षा देने वाले निजी विश्वविद्यालय शुरू करने की प्रक्रिया में बदलाव होगा।











