नागपुर। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ सीमाएं बंद होने से प्यार अधर में लटक गया था और टकराव के माहौल में तय शादियों के होने की उम्मीद बहुत कम लग रही थी। वाघा-अटारी गेट बंद कर दिए गए थे और इंतजार बहुत मुश्किल भरा था, लेकिन कुछ महीने पहले उम्मीद की एक किरण फिर से जगी। कम से कम 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर भारत के शहरों नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल पहुंचीं, ताकि वे सिंदूर के अटूट बंधन में बंध सकें। बता दें कि गृह मंत्रालय द्वारा दी गई विशेष छूट की वजह से ये यात्राएं संभव हो पाईं।
पाकिस्तान से भारत आईं दुल्हनें दुल्हनों के साथ पाकिस्तानी रिश्तेदारों को आने की इजाजत तो थी लेकिन उन्हें तय समय के भीतर वापस लौटना था, जिसकी वजह से ये शादियां काफी सादगी से हुईं। आमतौर पर भारत का वीजा रखने वाले पाकिस्तानी वाघा बॉर्डर से आसानी से आ-जा सकते हैं, लेकिन जमीनी सीमाएं बंद होने के कारण उन्हें अब हवाई जहाज से घूमकर आना पड़ा। इस साल अप्रैल से जून के बीच दुल्हनें अपने लगभग 450 रिश्तेदारों के साथ भारत आईं।
लंबा इंतजार हुआ खत्म
नागपुर के सामुदायिक नेता राजेश झांबिया ने कहा, आखिरकार लंबा इंतजार खत्म हो गया। काफी प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने सिंधी महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को शादी के लिए भारत आने के लिए वीजा जारी किए। पाकिस्तान से आए सिंधी प्रवासियों के लिए काम करने वाले झांबिया ने बताया कि दुल्हनें और उनके परिवार के लोग मस्कट, दुबई, श्रीलंका और अन्य देशों के रास्ते ट्रांजिट होकर भारत पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि सिंधी समुदाय के लोग ऐसी शादियों के लिए पहले पंजाब में वाघा-अटारी सीमा के रास्ते भारत आते थे। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सब कुछ बदल गया। सरकार ने अटारी मार्ग से भारत आने की योजना बना रहे लोगों के वीजा खारिज कर दिए। झांबिया ने बताया कि इसके बाद उन्होंने रायपुर में संत युधिष्ठिरलाल शदाणी से संपर्क किया। वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल शदाणी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि शदाणी दरबार ने उन पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार करनी शुरू की जिनकी भारत में पुरुषों से सगाई हो चुकी थी। उन्होंने कहा, करीब 150 दुल्हनें थीं जिनकी शादी नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और भारत के अन्य शहरों में होनी थी। मंदिर ने इन महिलाओं और उनके परिवारों को भारत आने की सुविधा देने के लिए सूची के साथ गृह मंत्रालय (MHA) से संपर्क किया और वीजा जारी करने का अनुरोध किया।
भारत पहुंचने के लिए करनी पड़ी मशक्कत
लंबे समय के वीजा पर भारत में रह रहे इकेश जशनानी की सगाई ‘प्री-सिंदूर’ दौर में हुई थी और उन्होंने पिछले साल ही शादी की योजना बनाई थी। उनकी होने वाली पत्नी आरती सिंह के खानपुर तहसील से एक मुश्किल सफर तय करके मई 2025 में वाघा बॉर्डर से बस एक किलोमीटर दूर ही पहुंची थीं, तभी भारत ने अटारी गेट बंद कर दिया। एक साल से ज्यादा समय के बाद आरती मस्कट होते हुए नागपुर पहुंचीं और मार्च में शादी की। वीजा पाबंदियों की वजह से उनके साथ सिर्फ उनके भाई ही आ पाए और उनके माता-पिता वहीं रह गए। वह कहती हैं, काश बॉर्डर खुल जाएं और मैं उनसे एक बार मिल सकूं।
दुल्हन ही नहीं बल्कि दूल्हा भी पाक से भारत आया
भारत आने वाली उड़ानों में एक दूल्हा भी था। सिंध के घोटकी से राभेल जसवाणी अपने माता-पिता के साथ नागपुर में श्रिया से शादी करने के लिए भारत आए थे और तब से यहीं रह रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं भारत में बसना चाहता हूँ और बॉर्डर खुलने पर अपने माता-पिता को भी यहां लाना चाहता हूँ।











