मंत्रिमंडल बैठक में 4 फैसले महत्वपूर्ण, छात्रों को सबसे बड़ा गिफ्ट !
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। आज की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय के जनसंपर्क कक्ष की ओर से मंत्रिमंडल की बैठक के महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की गई। इस बैठक में खेल, उच्च व तकनीकी शिक्षा, राजस्व तथा विधि व न्याय विभाग से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। नागपुर में लता मंगेशकर विश्वविद्यालय स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। साथ ही अहिल्यानगर में डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल विश्वविद्यालय स्थापित होगा। यह निजी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय होगा और यहां चिकित्सा विज्ञान, दंत चिकित्सा, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग इन विद्याशाखाओं में स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इन विश्वविद्यालयों से संबंधित क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने में मदद होगी। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले राज्य के खिलाड़ियों तथा उनके खेल मार्गदर्शकों को दिए जाने वाले नकद पुरस्कार की नीति में सुधार करने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इस फैसले से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलने में मदद होगी। वहीं जत नगर परिषद को प्रशासनिक भवन बनाने के लिए मौजे जत, जिला सांगली में 2 हजार 585 वर्ग मीटर सरकारी जमीन देने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इस फैसले से नगर परिषद के प्रशासनिक कामकाज के लिए आवश्यक भवन के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
पिंपलगांव बसवंत में वरिष्ठ स्तर का दीवानी न्यायालय नासिक जिले के पिंपलगांव बसवंत (ता. निफाड) में वरिष्ठ स्तर का दीवानी न्यायालय शुरू करने को मंजूरी दी गई है। इसके लिए आवश्यक पदों के सृजन तथा संबंधित खर्च के प्रावधान को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इस फैसले से निफाड तालुका के नागरिकों को न्यायालयीन कामकाज के लिए अधिक सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, आज की मंत्रिमंडल बैठक में खेल क्षेत्र के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ स्थानीय स्वशासी संस्थाओं और न्यायव्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के सामने महायुति को मैनेज करने की चुनौती
महायुति सरकार में ऊपर से सब कुछ सुचारू दिखाई दे रहा हो, फिर भी पिछले सप्ताह की राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच के आंतरिक समीकरण फिर से चर्चा में आए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कैबिनेट बैठक बुलाई है और उसके बाद मुख्यमंत्री निवास पर महायुति की समन्वय समिति की बैठक और स्नेहभोज हुआ। यह बैठक केवल सरकार के कामकाज की समीक्षा के लिए नहीं, बल्कि तीनों दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खींचतान को नियंत्रण में रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले सप्ताह नासिक और रायगढ़ के पालकमंत्री पद का डेढ़ साल से अधिक समय से लंबित विवाद आखिरकार सुलझा लिया गया। नासिक भाजपा के पास, जबकि रायगढ़ शिवसेना के भरत गोगावले को दिया गया।
महिला आरक्षण 2034 तक लटकाना चाहता है विपक्ष
कांग्रेस और महाविकास आघाडी के लोग महिला आरक्षण विरोधी हैं। उन्हें 2029 में महिलाओं को आरक्षण नहीं देना है। 2034 तक उन्हें महिला आरक्षण को लटकाना है, ऐसा आरोप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लगाया है। साथ ही महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस और महाविकास आघाडी के दोहरेपन का भी फडणवीस ने पर्दाफाश किया। फडणवीस मीडिया से संवाद कर रहे थे। कांग्रेस और महाविकास आघाडी के नेता लगातार बुद्धिभेद करने का प्रयास कर रहे हैं। 2023 में चिदंबरम सहित सभी ने महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान किया था। उस विधेयक में डीलिमिटेशन करना होगा और डीलिमिटेशन करने के लिए नई जनगणना के आंकड़े आने के बाद यह विधेयक लागू होगा, ऐसा स्पष्ट रूप से कहा गया था। चिदंबरम सहित सभी ने इसे स्वीकार किया था। कोविड के कारण जनगणना आगे बढ़ गई। मोदी के मन में 2029 में महिलाओं को आरक्षण देना था। इसलिए एक छोटा-सा संशोधन लाया गया था। उसके बजाय उसमें शिथिलता देकर पुरानी जनगणना के अनुसार किया जा सके ऐसा संशोधन था। उसे सभी ने नकार दिया। उन्हें महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं है। 2023 में उन्होंने महिला आरक्षण का समर्थन किया। क्योंकि समर्थन नहीं भी दिया तो विधेयक पास होने वाला है, यह पता था। इसलिए उन्होंने समर्थन दिया। अब जब वास्तव में आरक्षण देने का समय आया तो विरोध किया। डीलिमिटेशन का निर्णय 2023 में ही हुआ। उसे कांग्रेस ने मतदान करके मंजूरी दी। अपने राज्य के लोग उस पर बोल रहे हैं, उन्होंने कौन सा नशा किया है पता नहीं। इनकी वजह से संविधान में डीलिमिटेशन में वही करने के लिए वे अमान्य करते हैं। 2034 में जाएगा इसलिए कांग्रेस पार्टी और अन्य लोगों को महिलाओं को 2029 में आरक्षण नहीं देना है। उन्हें 2034 तक इस विषय को खींचकर ले जाना है। ये लोग बुद्धिभेद कर रहे हैं। चिदंबरम ने ट्वीट किया तब मैंने उसे फैक्ट फिगर्स सहित जवाब दिया है, ऐसा फडणवीस ने स्पष्ट किया।











