13 लाख का वेंटिलेटर 22.5 लाख में खरीदने का दावा;
पूर्व राज्यमंत्री सुनील देशमुख ने पेश किए दस्तावेज
लोकवाहिनी संवाददाता
अमरावती। अमरावती के जिला सामान्य अस्पताल के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज के माध्यम से खरीदे गए 20 वेंटिलेटर की खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया गया है। पूर्व राज्यमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने दावा किया है कि करीब 13 लाख रुपये कीमत वाला वेंटिलेटर 22.5 लाख रुपये में खरीदा गया। उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में संबंधित दस्तावेज और कोटेशन भी प्रस्तुत किए हैं।
डॉ. देशमुख के अनुसार, वेंटिलेटर की खरीद संबंधित कंपनी के बड़े शहरों में मौजूद अधिकृत वितरक या डीलर के माध्यम से नहीं की गई। इसके बजाय वाशिम जैसे छोटे शहर के एक सप्लायर से यह खरीद की गई। उनका आरोप है कि जिला नियोजन समिति (डीपीडीसी) से बड़ी राशि उपलब्ध कराए जाने के बाद अधिकारियों और प्रशासन की मिलीभगत से खरीद प्रक्रिया में भारी अनियमितता की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी व्यवस्था में इस तरह की स्थिति बन गई है कि कोई भी अधिकारी आए और सरकारी धन की लूट करे।
भुगतान रोककर उच्चस्तरीय जांच की मांग
डॉ. सुनील देशमुख ने मांग की है कि संबंधित सप्लायर का भुगतान तत्काल रोका जाए और पूरी खरीद प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से इस मामले में जांच के आदेश देने की मांग की है।
वर्ष 2025-26 में जिला नियोजन समिति से उपलब्ध कराए गए फंड से जिला सामान्य अस्पताल के लिए हैमिल्टन सी-3 कंपनी के 20 वेंटिलेटर खरीदे गए। इनकी कुल कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकारी खरीद में प्रति वेंटिलेटर की कीमत करीब 22.55 लाख रुपये दर्शाई गई है। डॉ. देशमुख ने अपने सहयोगियों के माध्यम से हैमिल्टन सी-3 वेंटिलेटर कंपनी के अधिकृत सप्लायर मार्क एंटरप्राइजेज, नागपुर से कोटेशन मंगवाया। उनके मुताबिक, वहां इसी वेंटिलेटर की कीमत करीब 13.12 लाख रुपये प्रति यूनिट बताई गई।
डॉ. देशमुख का दावा है कि प्रति वेंटिलेटर कीमत में करीब 10 लाख रुपये का अंतर है। इस आधार पर उन्होंने 20 वेंटिलेटर की 4.5 करोड़ रुपये की खरीद में कम से कम 2 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि वेंटिलेटर उचित कीमत पर खरीदे गए होते तो इसी राशि में करीब 40 वेंटिलेटर खरीदे जा सकते थे। इससे अस्पताल में दोगुनी संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध होते और अधिक मरीजों को इसका लाभ मिल सकता था।











