नागपुर। दीपावली का पर्व आते ही घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियां स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। सुख, समृद्धि और वैभव की कामना के साथ भक्त मां लक्ष्मी को छप्पन भोग अर्पित करते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जिस मां लक्ष्मी की सालभर श्रद्धा से पूजा की जाती है, उन्हीं की पुरानी या खंडित मूर्तियों को दीपावली के बाद सड़कों, चौराहों और पेड़ों के नीचे लावारिस हालत में छोड़ दिया जाता है। नागपुर की विभिन्न कॉलोनियों और चौक-चौराहों पर दूषित स्थानों पर पड़ी गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि कुछ लोगों की भक्ति केवल त्योहार और दिखावे तक सीमित रह गई है। भाई दूज आते-आते कई स्थानों पर पुरानी मूर्तियां और पूजन सामग्री खुले में पड़ी दिखाई देती हैं। इससे धार्मिक भावनाएं आहत होने के साथ-साथ पर्यावरण और शहर की स्वच्छता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
नई मूर्तियों की स्थापना, पुरानी का क्या?
धनतेरस के अवसर पर अनेक परिवार गणेश-लक्ष्मी की नई मूर्तियां घर लाते हैं और दीपावली के शुभ मुहूर्त में उनकी स्थापना कर पूजा करते हैं। नई मूर्तियों को घर के मंदिर में स्थान दे दिया जाता है, लेकिन पुरानी मूर्तियों के उचित विसर्जन या संरक्षण को लेकर लापरवाही बरती जाती है। कई लोग उन्हें उचित स्थान पर पहुंचाने के बजाय सड़क किनारे, पीपल के पेड़ों के नीचे अथवा कचरे के ढेर के पास छोड़ देते हैं। हिंदू परंपरा में पूजित मूर्तियों को सम्मानपूर्वक विदा करने की मान्यता है। ऐसे में उन्हें खुले में फेंकना धार्मिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
पुरानी मूर्तियों का सम्मानपूर्वक करें निस्तारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरानी मूर्तियों को श्रद्धा और सम्मान के साथ विदा करना चाहिए। मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन निर्धारित और पर्यावरण-अनुकूल स्थानों पर किया जा सकता है। यदि विसर्जन संभव न हो, तो उन्हें स्वच्छ कपड़े में लपेटकर किसी पवित्र एवं सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों को जलस्रोतों में विसर्जित करने से बचना चाहिए। ऐसी मूर्तियों के लिए निर्धारित संग्रह केंद्रों या नगर निगम की व्यवस्था का उपयोग करना उचित है। पूजन सामग्री का भी उचित तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए।
नगर निगम और सामाजिक संस्थाओं की पहल जरूरी
दीपावली के बाद पुरानी और खंडित मूर्तियों के सम्मानजनक संग्रह एवं निस्तारण के लिए नागपुर महानगरपालिका और सामाजिक संस्थाओं की ओर से विशेष व्यवस्था को बढ़ावा देना जरूरी है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और कॉलोनियों में मूर्ति संग्रह केंद्र बनाए जाएं, ताकि नागरिक श्रद्धापूर्वक मूर्तियां वहां जमा कर सकें।














