धनतेरस पर 180 करोड़ रुपये के सोने की बिक्री, नागपुर के बाजार में दौलत की चमक, लेकिन पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी कहां?
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। धनतेरस के शुभ मुहूर्त पर नागपुर के सराफा बाजार में करीब 180 करोड़ रुपये के कारोबार का दावा सराफा कारोबारियों की ओर से किया गया है। सोने की खरीदारी को मिले इस जबरदस्त प्रतिसाद ने नागपुर की आर्थिक समृद्धि और बाजार की बढ़ती ताकत को उजागर किया है। इसके अलावा शहर के वाहन, कपड़े, घड़ियां, किराना और अन्य शोरूम को मिलाकर 500 से 700 करोड़ रुपये तक के कारोबार की संभावना जताई जा रही है। एक ओर जहां महाराष्ट्र के कई हिस्से सूखे और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं नागपुर में करोड़ों रुपये की खरीद-बिक्री हो रही है। यह निश्चित रूप से शहर के लिए गर्व की बात है। लेकिन सवाल यह है कि करोड़ों का कारोबार करने वाले इन व्यापारियों की पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी कहां है?
दुकानों और शोरूम के सामने आकर्षक विद्युत रोशनी करना किसी को आपत्तिजनक नहीं लग सकता, लेकिन ग्राहकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगे पेड़ों को ही रोशनी से सजाना कितना उचित है? पेड़ शहर की प्राकृतिक संपत्ति हैं, सजावट की वस्तु नहीं। उन पर इस तरह विद्युत रोशनी लगाना पर्यावरण और पेड़ों की प्राकृतिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
इस मुद्दे पर लोकवाहिनी मीडिया पहले भी समाचार प्रकाशित कर संबंधित कारोबारियों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर चुका है। इसके बावजूद संबंधित शोरूम के सामने पेड़ों पर की गई चमकदार विद्युत सजावट अब तक नहीं हटाई गई है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित कारोबारियों ने समाचार में उठाई गई आपत्ति को गंभीरता से नहीं लिया।















