गढ़चिरोली , संवाददातानवंबर का महीना समाप्त होने को है, लेकिन जिले में सरकारी धान खरीदी आज तक शुरू नहीं हुई है। पहले किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण में दिक्कत आई, और अब जिला मार्केटिंग फेडरेशन को धान खरीदी का लक्ष्य ही नहीं मिला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना लक्ष्य के सरकारी खरीदी कैसे शुरू होगी?
सरकारी खरीदी बंद, किसान बेचने को मजबूर
हर साल दिवाली से पहले धान खरीदी शुरू कर दी जाती है, ताकि किसानों को समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम न मिले। लेकिन इस बार देरी से किसानों को अपना धान निजी व्यापारियों को कम रेट पर बेचना पड़ रहा है। सरकार ने जिले में 154 सरकारी धान खरीद केंद्र मंजूर किए हैं, जहाँ धान की खरीदी 2,369 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर की जानी है।
सरकारी केंद्रों पर धान बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण ज़रूरी किया गया है। पंजीकरण 15 नवंबर से शुरू हुआ लेकिन अब तक 20,453 किसानों ने पंजीकरण कराया, जबकि 80% किसानों का पंजीकरण अभी बाकी है। अंतिम तारीख 30 नवंबर रखी गई थी लेकिन बढ़ने की पूरी संभावना है। सरकार की धीमी नीति के कारण इस वर्ष केंद्र खुलने में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है।
लक्ष्य तय न होने से प्रक्रिया अटकी
खरीफ सीजन में जिले में 1,26,000 हेक्टेयर में धान की खेती हुई। कृषि विभाग के अनुसार इस साल प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 37 क्विंटल रहने का अनुमान है। लेकिन अभी तक सरकार ने जिला मार्केटिंग फेडरेशन को धान खरीदी का लक्ष्य नहीं दिया है। इसी वजह से सरकारी खरीदी शुरू नहीं हो पा रही है।












