लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। महानगरपालिका में महापौर पद के लिए आरक्षण की घोषणा कर दी गई है। घोषित आरक्षण के अनुसार महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित रहेगा। गुरुवार को मुंबई स्थित मंत्रालय में शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल की उपस्थिति में यह प्रक्रिया संपन्न हुई। महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित रहेगा। इस घोषणा के साथ ही मनपा में महापौर पद के लिए संभावित राजनीतिक समीकरण स्पष्ट होने लगे हैं।
ज्ञात हो कि, नागपुर मनपा में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की है। भाजपा ने 151 सीटों में से अपने सहयोगी शिवसेना के साथ 102 सीटें जीती हैं। प्रचंड बहुमत के साथ नागपुर मनपा में भाजपा का महापौर बनना निश्चित है। वहीं आरक्षण की घोषणा के साथ ही भाजपा में महापौर पद के लिए उम्मीदवारों की खोज के लिए मंथन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र से शिवानी दानी, अश्विनी जिचकार और विशाखा मोहोड़ के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। इसके अलावा, वरिष्ठ पार्षद नीता ठाकरे, दिव्या धुरडे, मंगला खवरे और साधना बरडे के नाम भी सामने आए हैं।
पिछले पंद्रह वर्षों में मनपा में आरक्षण पर नजर डालें तो, 2007 में महापौर पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया था। उस समय भाजपा के देवराव उमरेडकर महापौर बने थे। हालांकि, जाति सत्यापन समिति ने जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें और आठ अन्य पार्षदों को अयोग्य घोषित कर दिया था। इसलिए, भाजपा ने उनके स्थान पर माया इवनाते को महापौर नियुक्त किया था। इसके बाद, ढाई वर्षों के लिए महिला (सामान्य श्रेणी) के लिए आरक्षण लागू किया गया। इस दौरान, अर्चना डेहणकर 24 दिसंबर 2009 से 4 मार्च 2012 तक महापौर रहीं।
भाजपा ने अनिल सोले को महापौर बनाया। वे 5 मार्च 2012 से 5 सितंबर 2014 तक महापौर रहे। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण किया गया और प्रवीण दटके 5 सितंबर 2014 से 4 मार्च 2017 तक महापौर रहे। 2017 में हुए चुनावों के बाद, महापौर का पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था, इसलिए भाजपा ने नंदा जिचकार को मौका दिया। वह 5 मार्च 2017 से 22 नवंबर 2019 तक महापौर रहीं। अगले तीन वर्षों तक, यानी नवंबर 2019 से मार्च 2022 तक, सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण था। इस दौरान संदीप जोशी और दयाशंकर तिवारी डेढ़-डेढ़ साल के लिए महापौर बने। आठ साल बाद होने वाले चुनावों में भाजपा सत्ता में बनी रहेगी और फडणवीस ही मुख्य रणनीतिकार रहेंगे।












