लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 2026 सोमवार को एक ऐतिहासिक परिस्थिति के बीच शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन जहाँ एक ओर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राज्य की आर्थिक प्रगति का खाका पेश किया, वहीं दूसरी ओर सदन ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
सदन की कार्यवाही ‘वन्दे मातरम्’, ‘राष्ट्रगान’ और राज्य गीत ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ की गूँज के साथ शुरू हुई। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने अभिभाषण में महायुति सरकार की उपलब्धियों और ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के रोडमैप पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र देश की जीडीपी (GDP) में लगभग 13.5 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
वर्ष 2024-25 में राज्य को 1.64 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ, जो देश के कुल एफडीआई प्रवाह का 39 प्रतिशत है। सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा है। इस विजन के हिस्से के रूप में, सरकार का लक्ष्य 2030 तक 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना और लगभग 50 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है।
जनवरी 2026 में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे 40,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है। राज्यपाल ने अपने संबोधन की शुरुआत मराठी में की और बाद में वे हिंदी में बोलने लगे।
महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र 2026 के लिए मुंबई स्थित विधानसभा परिसर पहुंचने पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने स्वागत किया। इस मौके पर गवर्नर को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राजमाता जीजाऊ, छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और भगवान बिरसा मुंडा जैसे समाज सुधारकों के आदर्शों से निर्देशित होगी।











