चार घंटे के अनोखे प्रदर्शन के बाद मिली शिक्षक की नियुक्ति
लोकवाहिनी, संवाददाता
भंडारा। स्कूल खुलने के बावजूद एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं होने से नाराज विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने सोमवार को भंडारा जिला परिषद परिसर में अनोखा प्रदर्शन किया। बच्चों ने शिक्षा विभाग के कार्यालय परिसर में ही अपनी कक्षा लगा दी। राष्ट्रगान और महाराष्ट्र गीत के बाद प्रार्थना सभा (परिपाठ) भी आयोजित की गई। करीब चार घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल में एक शिक्षक की नियुक्ति करने का आदेश जारी किया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
कभी बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी और दो शिक्षकों की मेहनत से महाराष्ट्र की आदर्श सरकारी स्कूलों में शामिल हुई तुमसर तहसील के सोरना जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय की स्थिति आज बेहद चिंताजनक हो गई है। राज्य स्तर पर सम्मानित इस विद्यालय में पिछले कई महीनों से एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। मजबूर होकर विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों को जिला परिषद कार्यालय पहुंचकर अनोखा आंदोलन करना पड़ा।
स्कूली गणवेश पहने मासूम बच्चों ने हाथों में ‘हमें शिक्षक दो’ और ‘शिक्षा हमारा अधिकार है’ जैसे तख्तियां लेकर जिला परिषद परिसर में ही कक्षाएं लगाईं। यह दृश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला साबित हुआ। सोरना जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय वर्ष 2018 में मात्र 16 विद्यार्थियों के साथ बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानाध्यापक मेश्राम और सहायक शिक्षक कैलास चव्हाण के अथक प्रयासों से विद्यालय की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। डिजिटल शिक्षा, आधुनिक कक्षाएं, आनंददायी शिक्षण पद्धति, स्वच्छ परिसर, नवाचार और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी के कारण विद्यालय पूरे महाराष्ट्र में पहचान बनाने में सफल रहा।
विद्यालय ने ‘मुख्यमंत्री मेरी स्कूल, सुंदर स्कूल’ अभियान के तहत वर्ष 2024 में राज्य में प्रथम स्थान तथा 2025 में भंडारा जिले में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विद्यालय के उत्कृष्ट कार्यों का अध्ययन करने के लिए दिल्ली से एनआईपा (NIPA) की टीम भी पहुंची थी, जिसने विद्यालय पर पांच मिनट की डॉक्यूमेंट्री तैयार की थी। यह विद्यालय सरकारी स्कूलों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जाने लगा था। विद्यालय की स्थिति दिसंबर 2025 के बाद बदलनी शुरू हुई। परिवर्तन के सूत्रधार शिक्षक कैलास चव्हाण का तबादला हो गया और फरवरी 2026 में प्रधानाध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद विद्यालय पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गया। कुछ समय के लिए प्रतिनियुक्ति पर एक शिक्षक की व्यवस्था की गई थी, लेकिन बाद में उन्हें भी वापस बुला लिया गया, जिससे विद्यालय में पढ़ाई लगभग ठप हो गई। ग्रामीणों और अभिभावकों ने पंचायत समिति, जिला परिषद और जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपकर शिक्षक नियुक्त करने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आखिरकार 3 अगस्त को विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला परिषद परिसर में ही कक्षाएं लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।
शिक्षा मंत्री से भी लगाई थी गुहार
ग्रामीणों के अनुसार, जब शिक्षा मंत्री दादा भुसे भंडारा दौरे पर आए थे, तब शिक्षक कैलास चव्हाण ने स्वयं उनसे मिलकर विद्यालय के शिक्षकों का तबादला नहीं करने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि इस विद्यालय की सफलता वर्षों की मेहनत का परिणाम है और अचानक तबादला से विद्यालय प्रभावित होगा। मंत्री ने सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया, लेकिन वह अमल में नहीं आ सका।
कई ज्ञापन सौंपे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं : अभिभावक
अभिभावकों ने बताया कि शिक्षक की मांग को लेकर कई बार शिक्षा विभाग को ज्ञापन सोपे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार जिला परिषद परिसर में हुए इस अनोखे आंदोलन के बाद शिक्षा विभाग ने विद्यालय में एक शिक्षक की नियुक्ति कर दी, जिसके बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।
आंदोलन के बाद प्रशासन ने दिया आश्वासन
विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद जिला परिषद प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि नई शिक्षक भर्ती होने तक स्थायी नियुक्ति संभव नहीं है। हालांकि, तब तक पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से एक शिक्षक और दो स्वयंसेवकों की व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी गांव के सरपंच धर्मपाल ध्रुवे ने दी। जिस विद्यालय ने महाराष्ट्र में सरकारी शिक्षा की नई मिसाल पेश की, जिसे देखने और उसके मॉडल का अध्ययन करने दिल्ली से टीम पहुंची, उसी विद्यालय के विद्यार्थियों को आज शिक्षक की मांग के लिए सड़क पर उतरना पड़ा। यह घटना केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। सोरना विद्यालय का आंदोलन यह संदेश देता है कि पुरस्कारों और घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण प्रत्येक कक्षा में योग्य शिक्षक की उपलब्धता है।












