मुंबई उच्च न्यायालय का सवाल : विस्तृत जांच के निर्देश : सदानंद दाते का जवाब
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार से मौखिक रूप से पूछा कि क्या उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार मुंढवा भूमि सौदा मामले में लाभार्थी नहीं हैं, जबकि सरकारी जमीन को भारी रियायती कीमत पर खरीदने वाली कंपनी में उनकी 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। राज्यसभा सदस्य पार्थ पवार ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ में बहुसंख्यक हिस्सेदार हैं। इस कंपनी ने पुणे के पॉश मुंढवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी जमीन उसके वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी थी। न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने कहा कि कंपनी में एक प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति को मामले में आरोपी बनाया गया है, लेकिन जांच के में उस व्यक्ति (पार्थ पवार) पर कोई बात नहीं की गयी है, जिसके पास कंपनी की 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
अदालत ने यह सवाल पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत येवले को गिरफ्तारी से पहले जमानत देते हुए उठाया। येवले पर कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर विवादित लेन-देन को सुगम बनाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। येवले ने लेन-देन में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और दावा किया है कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। अदालत ने पिछले महीने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से येवले की याचिका में किए गए उस दावे पर जवाब मांगा था, जिसमें कहा गया था कि पार्थ पवार को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया क्योंकि वह बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं। डीजीपी सदानंद दाते ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि मामले की अधिक पेशेवर और विस्तृत जांच की आवश्यकता है और इसलिए पुणे के पुलिस आयुक्त को मामले की आगे जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने बृहस्पतिवार को इस बयान को स्वीकार कर लिया, लेकिन पुलिस की जांच पर सवाल उठाया। न्यायमूर्ति जामदार ने मौखिक रूप से सवाल किया, जांच अधिकारी के तौर पर आपका रुख यह है कि 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है और जिस व्यक्ति के पास एक प्रतिशत हिस्सेदारी है, उसे आरोपी बनाया गया है। क्या 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले पार्थ पवार इस लेन-देन के लाभार्थी नहीं हैं? प्राथमिकी के अनुसार, मुंढवा की यह जमीन ‘महार वतन’ भूमि की श्रेणी में आती थी, जो सरकारी संपत्ति थी और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण को पट्टे पर दी गई थी। इसे सरकार की अनिवार्य मंजूरी के बिना कम कीमत पर अमाडिया एंटरप्राइजेज को बेच दिया गया। पार्थ पवार इस कंपनी के निदेशक हैं। पुणे के मुंढवा इलाके में 40 एकड़ जमीन को 300 करोड़ रुपये में अमाडिया एंटरप्राइजेज को बेचे जाने का मामला पिछले साल के अंत में उस समय जांच के दायरे में आया, जब यह पता चला कि यह भूखंड सरकारी जमीन है और इसे बेचा नहीं जा सकता था। कंपनी को कथित तौर पर 21 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का भुगतान करने से भी छूट दी गई थी। जुलाई में पुणे की एक दीवानी अदालत ने विवादित मुंढवा भूमि लेनदेन में बिक्री विलेख रद्द करने का आदेश दिया था।












