आयोजन: विश्वविद्यालय में कृषि दिवस अवसर पर नानाजी आखरे का वक्तव्य
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी सदस्य और जीवविज्ञान विभाग के प्रमुख श्री नानाजी नारायणराव आखरे ने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं से जैविक खेती के उत्पादन को बढ़ाने के लिए शोध करने की अपील की। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री वसंतराव नाईक की जयंती और कृषि दिवस के अवसर पर बुधवार, 1 जुलाई, 2026 को एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। वनस्पति विज्ञान के स्नातकोत्तर विभाग के सभागार में आयोजित इस विशेष व्याख्यान के मार्गदर्शन आखरे ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की।
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी सदस्य और जैविक प्रमुख नानाजी नारायणराव आखरे व्याख्याता के रूप में उपस्थित थे, जबकि प्रो-वाइस चांसलर डॉ. अखिलेश पेशवे और विभागाध्यक्ष डॉ. रूपेश बदरे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अनाज उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से 1960 के बाद हरित क्रांति हुई और कृषि में रासायनिक उर्वरकों और औषधियों का उपयोग बहुत बढ़ गया। इससे अनाज का उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन ये विषैले पदार्थ मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। श्री आखरे ने कहा कि अनाज की मांग पूरी होने के कारण किसानों को विष-मुक्त अनाज उत्पादन के लिए जैविक खेती अपनानी चाहिए। 1960 से पहले पारंपरिक खेती की जाती थी। इसके कारण विष-मुक्त अनाज, सब्जियां और फल प्राप्त होते थे। किसान भी समृद्ध थे। पहले कृषि क्षेत्र का बहुत गौरव था।
हरित क्रांति के बाद कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और औषधियों के अंधाधुंध उपयोग के कारण बड़ी मात्रा में विषैले पदार्थ मानव शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। वर्तमान में किसान आर्थिक संकट में फंसे हुए हैं, क्योंकि वे कृषि से अपनी उत्पादन लागत भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसानों की आर्थिक परेशानी के लिए सरकार, समाज, किसान या शोधकर्ता, किसकी गलती है? इसका पता लगाना आवश्यक है। आखरे ने कहा कि किसानों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को अपने शोध के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करने की भूमिका निभानी होगी। कृषि उपज के लिए उचित गारंटीशुदा मूल्य प्राप्त करना आवश्यक है।
कृषि के साथ-साथ सहायक व्यवसाय होना भी आवश्यक है और यदि कृषि उत्पादों पर आधारित प्रसंस्करण उद्योग और कृषि उपज सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचती है, तो किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने किसानों से पारंपरिक जड़ी-बूटी वाली औषधियाँ और तिलहन उत्पाद खरीदने की अपील की। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि विदर्भ में सिंचाई क्षमता बढ़ने से यहां कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।
मातृशक्ति आज कृषि से दूर जा रही है। उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने और विषमुक्त उत्पादन के लिए मातृशक्ति को कृषि क्षेत्र में उतरने की आवश्यकता बताई। जैविक उर्वरकों से बने कृषि उत्पादों की मांग बढ़ गई है। आखरे ने यह भी कहा कि किसानों को धीरे-धीरे रासायनिक खेती से दूर होकर जैविक खेती को अपनाकर अपने जीवन को समृद्ध बनाना चाहिए।









