मुंबई। मनोज जरांगे पाटिल मुंबई की दिशा में निकल चुके हैं, लेकिन जरांगे को सबसे बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आई है. मनोज जरांगे अब जो मांग कर रहे हैं, वह मान्य नहीं की जाएगी. ऐसा बयान राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने दिया है. महाजन के स्पष्ट रूप से कहने के कारण जरांगे की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है. साथ ही जरांगे को लेकर सरकार के आक्रामक होने की भी बात कही जा रही है. मंत्री गिरीश महाजन ने मीडिया से बातचीत करते हुए बड़ा बयान दिया है. अब जो मांग मान्य करना संभव नहीं है, उसके बारे में भी अगर जरांगे आग्रह कर रहे हैं, तो सरकार के लिए भी यह संभव नहीं है. क्योंकि सरकार को सभी का ध्यान रखना पड़ता है. इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें इसमें से रास्ता निकालना चाहिए, ऐसा सीधा बयान गिरीश महाजन ने दिया है.
कास्ट वैलिडिटी रद्द ही कर दो, यह मांग को मानना संभव ही नहीं है? मुझे लगता है कि उनकी ऐसी कुछ-कुछ मांगें हैं कि वे कानून में कहीं भी फिट नहीं बैठतीं. उनका समाधान नहीं हो सकता. उन्हें इसका आग्रह नहीं करना चाहिए. उस समाज में कई विशेषज्ञ हैं, जो कई वर्षों से आरक्षण के लिए लड़ रहे हैं, उन्होंने भी सरकार की बात मान ली है. अब विशेषज्ञों के मान लेने के बाद सिर्फ हम किसी दूसरी बात पर अड़ जाएं, मुझे लगता है कि यह उचित नहीं है. सरकार के सकारात्मक होते हुए उन्हें आक्रामक भूमिका नहीं लेनी चाहिए, यह भी उन्होंने स्पष्ट किया.
मनोज जरांगे को अभी रुकना चाहिए, यह हमारी भूमिका है. इस बारे में पुलिस पूरी सावधानी बरत रही है. यह पूरा निर्णय पूरी तरह पुलिस का है. उच्च न्यायालय ने भी इस संदर्भ में कुछ निर्देश दिए हैं. मुझे लगता है कि उन्हें उसका पालन करना चाहिए, ऐसा आह्वान महाजन ने किया है. जरांगे के आंदोलन पर कल ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है. कई बार जरांगे पाटिल के साथ चर्चा हुई है. कई बार हमारा प्रतिनिधिमंडल उनके पास गया था. उनकी लगभग 13 मांगें थीं, उनमें से 12 मांगें मान्य हो चुकी हैं, ऐसी जानकारी भी उन्होंने दी. मुझे लगता है जैसे को तैसा जवाब यह विषय ही नहीं है. हमें यह विषय खत्म करना ही है. इन 12 वर्षों में हमारी सरकार ने मराठा समाज को न्याय देने का काम किया है. मराठा समाज के गरीब विद्यार्थियों को न्याय देने का काम किया है. ओबीसी को जो सुविधाएं और रियायतें हैं, वैसी ही सुविधाएं और रियायतें मराठा समाज को दी गई हैं. आज हजारों विद्यार्थी, हजारों बच्चे शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं. उन्हें उसका फायदा हुआ है. कई लोगों को एसबीसी के आरक्षण का फायदा हुआ है. नौकरियां भी दी हैं. इसलिए सभी संतुष्ट हैं. लेकिन जो बातें कानून के जरिए हल ही नहीं होंगी, ऐसी बातों की मांग करना उचित नहीं है, ऐसा उन्होंने कहा है.
जरांगे पाटिल की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों की आईसीयू में एडमिट करने की सलाह
अनशन कर रहे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जरूरत बताते हुए एक सरकारी चिकित्सक ने कहा कि उनके शरीर में पानी की भारी कमी हो गई है तथा ‘इलेक्ट्रोलाइट’ असंतुलन की स्थिति हो सकती है. जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए कूच करने के लगभग 14 घंटे बाद जरांगे आज पूर्वाहन करीब 11 बजे महाराष्ट्र के बीड जिले के पाटोदा पहुंचे. बीड जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. सतीशकुमार सोलंके ने बताया कि चिकित्सकों की एक टीम ने उनके स्वास्थ्य की जांच की. सोलंके ने कहा, मनोज जरांगे को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जरूरत है. उनके शरीर में पानी की गंभीर कमी है. वह केवल नसों के जरिए दिए जाने वाले तरल पदार्थ (आईवी फ्लूइड्स) के सहारे यात्रा जारी नहीं रख सकते. उन्होंने बताया कि मराठा कार्यकर्ता को ‘आईवी ड्रिप’ लगाई जाएगी. स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है. मैंने उनसे (इलाज कराने का) अनुरोध किया है. पहले इलेक्ट्रोलाइट की कमी को पूरा करने की आवश्यकता है. उसके बाद, हम उन्हें अस्पताल में भर्ती होने का सुझाव दिया. शरीर में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम या मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिजों का स्तर बहुत अधिक या बहुत कम होने पर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होता है. इसके लक्षणों में कमजोरी और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल है. यदि इसका इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. सोलंके ने कहा कि जरांगे का रक्त शर्करा भी काफी निचले स्तर पर है.
दौरा रद्द हो सकता है : जरांगे
इससे पहले दिन में, जरांगे ने खुद अपनी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लंबी यात्रा और अनशन जारी रखने की वजह से स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उनका यह दौरा रद्द हो सकता है. मराठा कार्यकर्ता ने कहा कि उनके पेट और पैरों में तेज जलन हो रही है. कुनबी जाति वंशावली वाले मराठा समुदाय के सदस्यों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की मांग कर रहे जरांगे को मुंबई पुलिस ने गणेश उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देते हुए आजाद मैदान में आंदोलन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. अनुमति न मिलने के बावजूद, जरांगे मंगलवार को कारों के काफिले के साथ महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के लिए रवाना हुए, जहां रास्ते में सैकड़ों ग्रामीणों ने उनका समर्थन किया. प्रस्तावित योजना के अनुसार जरांगे का काफिला बीड, अहिल्यानगर के श्रीगोंडा, पुणे के हडपसर और रायगड जिले के खोपोली से होते हुए 19 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान पहुंचेगा और कुल 400 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगा.















