संभावना: लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन बिल पेश करने का अनुमान
लोकवाहिनी संवाददाता
नई दिल्ली। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इसमें लोकसभा सीटें बढ़ाने के लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल को पास कराया जाएगा। इनके जरिए महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। 6 महीने (16 और 17 अप्रैल) पहले सरकार पहले प्रयास में कामयाब नहीं रही थी और लोकसभा में दो तिहाई बहुमत जुटा नहीं पाई थी। अब कहा जा रहा है कि सरकार ने संख्याबल जुटा लिया है। विशेष सत्र बुलाने से करीब एक हफ्ते पहले इसकी सूचना दी जा सकती है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हुआ था, लेकिन इसका अब तक सत्रावसान नहीं किया गया है।
लोकसभा में 543 सांसद हैं। 3 सीटें खाली हैं। इनमें से एनडीए के 318 सांसद हैं। बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई यानी 360 वोट चाहिए। अगर डीएमके के 22 सांसद बिल का समर्थन करते हैं तो बिल के समर्थन में 340 सांसद हो जाएंगे। यानी इसके बाद भी भाजपा को लगभग 20 सांसदों की जरूरत है। राज्यसभा में 245 सीटें हैं। 3 खाली हैं। इस तरह 240 में से एनडीए के 153 सांसद हैं। यहां बिल को पास करने के लिए 162 सांसद चाहिए। यानी, यहां भी एनडीए को छोटी पार्टियों के 9 सांसदों की जरूरत पड़ेगी। वहीं सूत्रों के मुताबिक, सरकार को एनसीपी (शरद पवार) जैसी अन्य पार्टियों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिनके 8 सांसद हैं। यह उम्मीद इस आश्वासन के बाद जगी है कि सीटों में 50% की पक्की बढ़ोतरी को बिल का हिस्सा बनाया जाए। पार्टी नेता सुप्रिया सुले ने पहले ही संकेत दिया था कि अगर 50% की गारंटी मिलती है, तो वे बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
संसद में विधेयक थोपने की कोशिश न करें : मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से परिसीमन के नए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संसद में व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को पहले की तरह जबरन पारित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि नए प्रस्तावों को संसद में विचार के लिए अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा की जाए।
खरगे ने संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही देरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। खरगे ने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। उनका कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को सभी राजनीतिक दलों को चर्चा का पर्याप्त मौका देना चाहिए।














