जम्मू। उत्तर प्रदेश के कानपुर और बरेली में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस व पोस्टर विवाद से उपजा ‘आई लव मुहम्मद’ मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। इस प्रकरण में जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेता जहांजैब सिरवाल ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफ़ा देने की धमकी दी है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार की टिप्पणियों और पुलिस की “पक्षपातपूर्ण व प्रतिशोधी कार्रवाई” पर कड़ी आपत्ति जताई।
सिरवाल ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश की स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के दृष्टिकोण से बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए, न कि केवल एक ही समुदाय को निशाना बनाया जाए।
भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि अगर पार्टी मुसलमानों का विश्वास बहाल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो उनके पास इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने खुद को “गौरवान्वित मुसलमान और भाजपा का प्रतिबद्ध सिपाही” बताते हुए कहा कि वह उस समय चुप नहीं रह सकते, जब उनके समुदाय की आस्था और अधिकारों को कुचला जा रहा हो।
पृष्ठभूमि : यूपी में क्या हुआ?
- कानपुर, 4 सितंबर – ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस में ‘‘आई लव मुहम्मद’’ लिखे बोर्ड लगाने पर पुलिस ने 24 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की।
- बरेली, 26 सितंबर – कोतवाली क्षेत्र की मस्जिद के बाहर शुक्रवार की नमाज़ के बाद बड़ी भीड़ ‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टर लेकर जमा हुई, जिसके बाद झड़पें शुरू हो गईं।
- पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए एक मौलवी समेत 68 लोगों को गिरफ्तार किया।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख़्त चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश पर बख्शा नहीं जाएगा।
सिरवाल ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री को किसी भी समुदाय को डराने-धमकाने का कोई अधिकार नहीं है।” उन्होंने साफ कहा कि भाजपा की एकता और सबके विश्वास का सपना तभी पूरा होगा, जब सरकार सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करेगी।
इस पूरे विवाद ने न सिर्फ़ उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमाया है, बल्कि अब भाजपा के भीतर से भी असंतोष की आवाज़ें उठने लगी हैं। सिरवाल के इस्तीफ़े की धमकी ने पार्टी नेतृत्व के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।











