भाजपा से मिलकर 100 सीटें लूटीं : ममता
लोकवाहिनी, संवाददाता:कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश है। साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई निर्वाचन आयोग से थी, जिसने भाजपा के लिए काम किया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के एक दिन बाद बनर्जी ने वहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है। मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख बनर्जी ने कहा, मुझे इस्तीफा क्यों देना चाहिए? हम हारे नहीं हैं। मतों की लूट हुई है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है? निवर्तमान मुख्यमंत्री बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट पर जनादेश को ‘लूट’ लिया गया और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई।
उन्होंने कहा, हम भाजपा से नहीं लड़ रहे थे; हम निर्वाचन आयोग से लड़ रहे थे जो भाजपा के लिए काम कर रहा था। मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा। इतिहास में एक काला अध्याय जुड़ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त खलनायक बन गए हैं। भाजपा ने 207 सीट जीतकर 294 सदस्यीय विधानसभा में निर्णायक बहुमत हासिल किया और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां और अधिकारी मिलीभगत से काम कर रहे थे और दावा किया कि छापेमारी, तबादले और पक्षपात ने हालात ऐसे बना दिए कि मुकाबला निष्पक्ष न रहे और संस्थानों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। हालांकि, बनर्जी ने संकेत दिया कि संवैधानिक विकल्प अभी भी खुले हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने दी नसीहत
ममता बनर्जी के इस अड़ियल रुख पर भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार किया है। शुभेंदु ने इस पूरे विवाद पर बहुत नपी-तुली और संवैधानिक टिप्पणी की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, सब कुछ संविधान में लिखा है। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। शुभेंदु अधिकारी का यह इशारा साफ है कि लोकतंत्र में हार-जीत और पद पर बने रहने की प्रक्रिया संविधान के नियमों से चलती है। बंगाल की हाई-प्रोफाइल चुनावी जंग के बाद अब सारा मामला कानूनी और संवैधानिक मर्यादाओं के इर्द-गिर्द सिमट गया है। ममता बनर्जी के बयान को उनके समर्थकों ने उनके जुझारू व्यक्तित्व से जोड़ा है, वहीं विपक्ष इसे नियम विरुद्ध बता रहा है।
ममता ने मारपीट पर एफआईआर क्यों नहीं कराई : अधिकारी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मारपीट वाले बयान पर बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा, मैंने जिला निर्वाचन अधिकारी से बात की। उन्होंने बताया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई। अगर ऐसा हुआ होता, तो शिकायत या FIR दर्ज होती। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।








