विकसित भारत@2047 को मिशन मोड पर साकार करें
लोकवाहिनी, संवाददाता
महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विवि के कुलगुरु डॉ. नितिन पाटील की अपील
नागपुर। विकसित भारत@2047 की अवधारणा को मिशन मोड पर साकार करने की अपील महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. नितिन पाटील ने की। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की 103वीं वर्षगांठ का समारोह मंगलवार को अंबाझरी मार्ग स्थित गुरुनानक भवन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु डॉ. नितिन पाटील बतौर मुख्य अतिथि मार्गदर्शन कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नागपुर विवि की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक डॉ. आशीष देशमुख, निकिता केमिकल्स के निदेशक डॉ. रवलीन सिंह खुराना, प्र-कुलगुरु डॉ. अखिलेश पेशवे, कार्यवाहक रजिस्ट्रार डॉ. विजय खंडा ल, प्रबंधन परिषद के सदस्य डॉ. नीलकंठ लंजे, डॉ. देवेन्द्र भोंगड़े, डॉ. योगेश भुटे, अजय अग्रवाल, डॉ. अजय चव्हाण, वामन तुर्के, डॉ. उज्ज्वला डांगे, मानविकी संकाय के डीन डॉ. श्यामराव कोरेटी, वाणिज्य और प्रबंधन संकाय की डीन डॉ. मेधा कानेटकर, अंत:विषय अध्ययन संकाय की डीन डॉ. मंगला हिरवाड़े उपस्थित थीं।
छात्रों के बीच सहयोग की भावना विकसित हो
कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कहा कि यदि सभी में सहयोग की भावना उत्पन्न हो जाए, तो गांव, समाज और राष्ट्र का विकास होता है। राष्ट्रसंत ने ग्राम गीता के माध्यम से यह शिक्षा दी है कि शिक्षा के द्वारा सहयोग की प्रबल भावना उत्पन्न होती है। गांव, समाज और राष्ट्र के विकास के लिए, अर्थात 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए, प्रत्येक छात्र में शिक्षा के माध्यम से सहयोग की भावना का संचार करना आवश्यक है। विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी छात्रों में शिक्षा के माध्यम से सहयोग की भावना उत्पन्न करने के लिए कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने समय-समय पर छात्र-केंद्रित निर्णय लिए हैं, ताकि उसके छात्र वैश्विक शिक्षा प्रतिस्पर्धा में हमेशा आगे रहें। किसी संस्था की स्थापना करना जितना आसान है, उसे बनाए रखना उतना ही कठिन है। स्वतंत्रता के दौर में 4 अगस्त 1923 को समाज सुधारकों द्वारा यहां लगाया गया विश्वविद्यालय का पौधा 103 वर्षों में एक विशाल बरगद के वृक्ष में तब्दील हो गया है, जो अनगिनत विद्यार्थियों को शिक्षा के पंख देकर उन्हें विश्वभर में स्वतंत्र रूप से विचरण करने का अवसर प्रदान करता है। यदि हम अतीत के इतिहास पर नजर डालें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इस 103 वर्षीय विश्वविद्यालय की स्थापना उतनी आसान नहीं रही जितनी प्रतीत होती है। अत्यंत संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से उभरकर, विश्वविद्यालय ने बदलते समय के साथ-साथ गतिशील कदम बढ़ाते हुए प्रगति की है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने ग्राम गीता के 29वें अध्याय, जीवन शिक्षण में तत्कालीन शिक्षा प्रणाली के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं। उस दौरान राष्ट्रसंत ने कौशल आधारित शिक्षा पर अधिक जोर दिया था।
डॉ. पाटील ने कहा कि यह हमारा दायित्व है कि हम न केवल का सम्मान करें, बल्कि अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों विश्वविद्यालय की स्थापना के समय शिक्षाविदों और संबंधित पक्षों द्वारा किए गए कठिन परिश्रम के प्रति आदर व्यक्त करें और साथ ही आने वाले वर्ष के लिए विजन निर्धारित करें। भले ही हमारे सामने कई समस्याएं और चुनौतियां हों, हमारा विजन सभी के लिए प्रेरणादायक होना चाहिए। एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय के रूप में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत@2047’ की अवधारणा को साकार करने का एक बड़ा अवसर है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विश्वविद्यालय मार्गदर्शिका का विमोचन किया गया। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. भाऊसाहब लहानुजी भोगे को राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज जीवन साधना पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे विधायक डॉ. आशीष देशमुख ने ग्रहण किया। डॉ. भोगे के मानपत्र का वाचन मराठी विभाग के प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र लेंडे ने किया। इस अवसर पर विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए। संचालन डॉ. अमृता इंदुरकर ने किया। आभार प्रभारी रजिस्ट्रार डॉ. विजय खंडाले ने माना।












