लोकवाहिनी संवाददाता
अमरावती। युवा स्वाभिमान पार्टी के विधायक रवि राणा ने शिवसेना (ठाकरे गुट) की उपनेता सुषमा अंधारे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। राणा ने आरोप लगाया कि सुषमा अंधारे ने अमरावती में आकर हनुमान गढ़ी के विकास को लेकर आपत्तिजनक और द्वेषपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अंधारे के बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि उद्धव ठाकरे पूरी तरह नास्तिक हो गए हैं।
अमरावती के नवाथे चौक में युवा स्वाभिमान पार्टी की ओर से दहीहंडी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम से पहले जिला महिला अस्पताल की दुर्घटना में जान गंवाने वाले तीन नवजात बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए रवि राणा ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि उद्धव ठाकरे को गरीबों और दुर्घटना में जान गंवाने वाले नवजात बच्चों के परिवारों के प्रति वास्तव में संवेदना होती, तो वे सुषमा अंधारे के माध्यम से उनके परिवारों को आर्थिक सहायता भेज सकते थे। राणा ने कहा कि चाहे सहायता एक करोड़ रुपये की होती या केवल एक रुपये की, इससे उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता दिखाई देती।
सुषमा अंधारे अमरावती में राजनीति कर रही हैं
रवि राणा ने आरोप लगाया कि सुषमा अंधारे ने अमरावती आकर जिस तरह के बयान दिए, उससे स्पष्ट है कि वे इस मुद्दे पर राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अंधारे ने देवी-देवताओं और धार्मिक आस्था को लेकर भी पहले कई बार टिप्पणियां की हैं। राणा ने आरोप लगाया कि नवनीत राणा द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किए जाने के कारण उन्हें जेल भेजा गया था। उन्होंने कहा कि आज उसी हनुमान गढ़ी को लेकर टिप्पणी की जा रही है। राणा ने सुषमा अंधारे के बयानों की निंदा करते हुए कहा कि देवी-देवताओं और लोगों की धार्मिक आस्था के खिलाफ टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। दरअसल, अमरावती के जिला महिला अस्पताल में हुई दुर्घटना में तीन नवजात बच्चों की मौत के बाद सुषमा अंधारे अमरावती पहुंची थीं। उन्होंने अस्पताल की घटना को लेकर महायुति सरकार पर सवाल उठाए थे। अंधारे ने आरोप लगाया था कि सरकार के पास जिला महिला अस्पताल के लिए 9 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने के लिए धन नहीं है, लेकिन राणा दंपती की हनुमान गढ़ी के विकास के लिए 121 करोड़ रुपये देने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया जाता है।
अंधारे की इस टिप्पणी के बाद नवनीत राणा ने भी पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक कार्यों के रास्ते में बाधा नहीं डालनी चाहिए और लोगों की आस्था तथा धर्म पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।














