छात्रों के भविष्य पर उठे गंभीर सवाल
परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर बहस तेज
अमरावती में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र की पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री एडवोकेट यशोमती ठाकुर ने इस प्रकरण पर केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के कारण देशभर के लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
यशोमती ठाकुर ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों से छात्रों में भारी निराशा और असंतोष का माहौल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिक तबादले किए जा रहे हैं, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस गंभीर प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि जब देश की प्रमुख परीक्षा प्रणाली पर ही सवाल उठ रहे हों, तो इसकी जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व को लेनी चाहिए।
इधर, छात्र संगठनों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में 5 जून को शाम 5 बजे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक से मशाल मोर्चा निकालने का ऐलान किया गया है। इस मोर्चे में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल होंगे। संगठन ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे अपने भविष्य की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर इस आंदोलन में शामिल हों।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।











