नाराज कार्यकर्ताओं ने किया पुस्तक का सामूहिक वाचन
लोकवाहिनी, संवाददाता:बुलढाणा। कॉम्रेड गोविंद पानसरे की चर्चित पुस्तक ‘शिवाजी कौन था?’ के प्रकाशक प्रशांत आंबी को मंगलवार (28 अप्रैल) को बुलढाणा में प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने से पहले ही पुलिस ने चिखली शहर में रोक लिया। यह स्थान बुलढाणा से करीब 25 किलोमीटर दूर है। इस कार्रवाई के बाद जिले सहित अन्य क्षेत्रों में भी हलचल मच गई है।
बताया गया है कि बुलढाणा में कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं द्वारा आंदोलन की तैयारी की गई थी, लेकिन आंबी और उनके साथ आए पदाधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता चिखली में ही रोक दिए गए। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई। पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रशांत आंबी और उनके साथियों ने चिखली में ही रुककर ‘शिवाजी कौन था?’ पुस्तक का सामूहिक वाचन किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्हें आंदोलन करने से जानबूझकर रोका गया।
पुलिस पर लगाए विश्वासघात के आरोप
मीडिया से बातचीत में आंबी ने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को आंदोलन की सूचना दी थी और संवैधानिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने जा रहे थे। ‘हम तोड़फोड़ के लिए नहीं, केवल पुस्तक का सार्वजनिक वाचन करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें रास्ते में ही रोककर विश्वासघात किया’, उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इतने पुलिसकर्मियों का उपयोग हमें रोकने के लिए किया गया, जबकि कार्रवाई कहीं और होनी चाहिए थी, उन्होंने टिप्पणी की। आंबी ने कोल्हापुर में भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल को उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार हुआ था, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस में की थी, लेकिन उचित कार्रवाई नहीं हुई।
आंबी ने प्रशासन से अपील की कि उन्हें बुलढाणा जाकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से संवैधानिक दायरे में रहकर आंदोलन करते आए हैं, फिर भी उन्हें रोका जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कानून-व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर जिले में बहस तेज हो गई है।






