लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ गाना तो सब जानते हैं। लेकिन इसके गीतकार के बारे में कम ही लोग जानते हैं, और इस मशहूर गाने के गीतकार नागपुर के ही रहने वाले थे। लोकप्रिय गीत ‘तुम तो ठहरे परदेसी…’ के कवि जहीर आलम का रविवार रात नागपुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। नब्बे के दशक में ‘तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे, सुबह पहली गाड़ी से, तुम तो लौट जाओगे’ गाना बेहद लोकप्रिय हुआ था। ये गाना हर घर, ऑटो, चाय की दुकान, होटल में बजता था। श्रोता इसकी धुन और हर शब्द को रट लेते थे।
इस मशहूर गाने के गीतकार नागपुर के मोमिनपुरा इलाके में रहने वाले जहीर आलम थे। अपने शब्दों से लाखों प्रशंसकों के दिलों में जगह बनाने वाले जहीर भाई जीवन भर उपेक्षित और आर्थिक रूप से तंगी में रहे। उनके निधन से नागपुर के साहित्य और संगीत जगत में शोक की लहर फैली हुई है। नागपुर के कई लोग मोमिनपुरा के एक छोटे से घर में रहने वाले जहीर आलम से अनभिज्ञ थे। बहुत कम लोगों को यह जानकारी थी कि देश भर में मशहूर हुए इस गीत के लेखक अपने शहर में बेहद सादगी और संघर्ष का जीवन जी रहे थे।
दिलचस्प बात यह है कि इस गीत को सबसे पहले कव्वाली गायिका किरण पाटनकर ने अपने शो में गाया था। बाद में, अल्ताफ राजा ने इसे गाया और इसे एक संगीत एल्बम में शामिल किया गया। शुरुआत में, एल्बम को ज्यादा सफलता नहीं मिली। हालांकि, एक साल बाद, उसी एल्बम को ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ नाम से दोबारा रिलीज किया गया और फिर इतिहास रच दिया गया।







