नागपुर, संवाददाता:शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। ‘शिक्षा का अधिकार (आरटीई)’ कानून लागू होने के बावजूद नागपुर जिले की 255 निजी, अनुदानित, बिना अनुदान वाली और स्वयं वित्त पोषित स्कूलों ने आज तक अनिवार्य आरटीई पंजीकरण ही नहीं लिया। इससे वंचित और गरीब वर्ग के छात्रों के शिक्षा अधिकार पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। यह खुलासा स्वयं शिक्षा विभाग ने किया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, जिले की 629 स्कूलें नियमित रूप से आरटीई के तहत पंजीकृत हैं, लेकिन इसके अलावा 255 स्कूलें बिना किसी मान्यता या पंजीकरण के शिक्षा गतिविधियां चला रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें कुछ प्रतिष्ठित नेताओं, ट्रस्टों और तथाकथित ‘शिक्षण सम्राटों’ की संस्थाएं भी शामिल हैं।
कुछ स्कूलों ने तो पहली बार पंजीकरण भी नहीं करवाया
सरकार के 31 दिसंबर 2013 के निर्णय के अनुसार, सभी माध्यमों की प्राथमिक स्कूलों के लिए RTE के तहत मान्यता अनिवार्य है। एक बार पंजीकरण के बाद हर तीन वर्ष में नवीनीकरण करना आवश्यक है। लेकिन, शिक्षा विभाग की जांच में सामने आया है कि कुछ स्कूलों ने आज तक पहली बार भी पंजीकरण नहीं कराया। इस लापरवाही से विभाग का बड़ा राजस्व भी प्रभावित हुआ है।
2022-2025 के आंकड़े ,कहां सबसे ज्यादा अनियमितता?
जांच के अनुसार शहर की कई स्कूलों ने आरटीई पंजीकरण नहीं लिया है। हिगंणा, काटोल और नागपुर ग्रामीण तालुकों में भी बड़ी संख्या में स्कूलें बिना मान्यता चल रहीं, यह स्थिति ग्रामीण बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसरों पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।
कारण बताओ नोटिस जारी 3 दिन में जवाब तलब
गंभीर अनियमितता को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने इन सभी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। स्कूलों को पूछा गया है कि बिना मान्यता के शैक्षणिक कार्य कैसे चलाया जा रहा है? स्कूलों को तीन दिनों में स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है।
वंचित विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन
स्कूलों द्वारा आरटीई नियमों का घोर उल्लंघन, गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के 25% आरक्षित प्रवेश और अन्य शिक्षा अधिकारों को बाधित करता है। शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि ‘शैक्षणिक अधिकारों को ठेंगा दिखाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ अब आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।











