आयोजन : रातुम नागपुर विवि में नशामुक्त युवा : विकसित भारत संकल्प अभियान
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। देश की छवि को निखारने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। यह प्रतिपादन कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने किया। भारत सरकार के युवा कल्याण एवं खेल मंत्रालय और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना – माय भारत के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को अंबाझरी मार्ग स्थित गुरुनानक भवन में ‘नशामुक्त युवा : विकसित भारत संकल्प अभियान’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर मार्गदर्शन कर रही थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन माध्यम से इस अभियान का उद्घाटन किया और युवाओं को मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में भारत के युवा कल्याण एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्यमंत्री रक्षा खड़से भी उपस्थित थीं। गुरुनानक भवन में आयोजित कार्यक्रम मैं प्रमुख अतिथि बतौर कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर, मनाली क्षीरसागर, प्र-कुलगुरु डॉ. अखिलेश पेशवे, कार्यवाहक कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ, वित्त एवं लेखाधिकारी हरीश पालीवाल, माय भारत के निदेशक सौरभ निषाद, राष्ट्रीय सेवा योजना के निदेशक डॉ. सोपानदेव पिसे उपस्थित थे।
आगे डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कहा कि राष्ट्र निर्माण नशामुक्त और स्वस्थ युवाओं पर निर्भर करता है। नशे के आदी और दुष्कर्म में फंसे युवा अपने करियर और सपनों से दूर होते जा रहे हैं। कुलपति ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जवानी के बहुमूल्य वर्ष शिक्षा प्राप्त करने में लगाकर नशे से दूर रहें। नशे से छुटकारा पाने और अच्छी आदतें बनाने के लिए 21 दिनों तक निरंतर प्रयास करना आवश्यक है। यदि आप अच्छी आदतें बनाना चाहते हैं, तो 21 दिनों तक प्रयास करने से आपको अपने जीवन का अर्थ समझ में आ जाएगा। कई युवा नशे के आदी हो जाते हैं, इसके कुछ कारण हो सकते हैं, इन कारणों का पता लगाना और नशे से उबरने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को पहल करनी चाहिए। कुलगुरु ने कहा कि देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय के रूप में, हमारा विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस अभियान में भाग ले रहा है। दूरस्थ माध्यम से अभियान का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि युवाओं में आत्मविश्वास जगाने और उन्हें नशे से दूर रखने के लिए ‘नशामुक्त युवा अभियान’ शुरू किया गया है। देश के 125 आध्यात्मिक संगठनों, सामाजिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों ने इस अभियान में हाथ मिलाया है। उन्होंने अपील की कि नशामुक्त विकसित भारत के संकल्प को इस अभियान के माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों और समाज तक पहुंचाया जाए। हमें भारत की स्वर्ण पीढ़ी के रूप में देखा जा रहा है और जीवन को सही दिशा देकर ही हम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश को युवाओं की ऊर्जा और कल्पनाशीलता की आवश्यकता है। मोदी ने कहा कि हर युवा को नशे के दलदल से निकालना आवश्यक है। नशा न केवल युवाओं को, बल्कि उनके करियर और पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। उन्होंने देश के युवाओं को नशे से मुक्त करने के लिए अगले 100 रविवारों तक इस कार्यक्रम को लागू करने के निर्देश दिए।
प्रस्तावना रखते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के निदेशक डॉ. सोपानदेव पिसे ने कहा कि हम राष्ट्रीय हित में एक अभियान के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘नशामुक्त युवा : विकसित भारत संकल्प अभियान’ केवल एक जन जागरूकता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए लिया गया एक राष्ट्रीय संकल्प है। नशामुक्त युवा : विकसित भारत संकल्प अभियान की शुरुआत भारत के चयनित 157 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में युवाओं के साथ ऑनलाइन संवाद स्थापित कर की गई है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 10 कॉलेजों में ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किए गए। विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए स्वस्थ, मजबूत चरित्र वाले और जिम्मेदार युवा का निर्माण आवश्यक है। नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकते हैं। नशा सिर्फ एक व्यक्ति को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर सकता है। कई छात्रों की शिक्षा अधूरी रह जाती है, करियर बर्बाद हो जाते हैं। स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और कई परिवार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करते हैं। नशे के खिलाफ लड़ाई न केवल सरकार की बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कि नशामुक्त रहना और दूसरों को भी नशामुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने उपस्थित सभी लोगों को व्यसनमुक्ति की शपथ दिलाई। संचालन रासेयो जिला समन्वयक डॉ. विनोद खेडकर ने किया। विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिकारियों, सभी संकाय के डीन, शैक्षणिक विभागों के प्रमुख, शिक्षक, अधिकारी, गैर-शिक्षण कर्मचारी और छात्र इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित थे।











