युवाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने को प्राथमिकता : सीएम
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया कि युवा पीढ़ी शिक्षा, कौशल विकास, खेलकूद, स्टार्टअप आदि क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भाग ले रही है। इसकी भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें पूरा समर्थन दिया जाएगा और स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ चर्चा करने के बाद एक अच्छी नीति तैयार की जाएगी। युवा मंथन पहल के तहत, ढोल ताशा टीम ने विश्व रिकॉर्ड बनाया, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद हुआ और युवाओं ने नशामुक्त महाराष्ट्र और देश के लिए शपथ ली।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में रेशिमबाग मैदान में ये कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में 25,000 से अधिक युवा लड़के-लड़कियों ने भाग लिया। महाराष्ट्र की परंपरा, ढोल ताशा टीम ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। आधार कार्ड से पंजीकृत 585 ढोल धारकों की इस पहल ने विश्व रिकॉर्ड कायम किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए पूरी टीम को बधाई दी। प्रसिद्ध खेल टिप्पणीकार रिधिमा पाठक ने युवा पीढ़ी के आदर्श माने जाने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ क्रिकेटर तिलक वर्मा, राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता दिलीप महाडु गावित, अर्जुन देशपांडे और किरण शाहजी से बातचीत की और युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उनके काम से मिली प्रेरणा और अनुभव साझा किए।
राजनीति व्यवसाय नहीं मिशन
राजनीति व्यवसाय नहीं मिशन बतौर मुख्यमंत्री प्रेशर हैंडल करने से जुड़े सवाल पर फडणवीस ने कहा-मेरे लिए राजनीति व्यवसाय नहीं मिशन है। मेरा सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन का उपक्रम है। मेरी उम्र 18 वर्ष की थी। एबीवीपी ने श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा झंडा फहराने का निर्णय लिया था। मेरे साथ नागपुर से 30 युवा उधमपुर पहुंचे। देश भर से 10 हजार युवा पहुंचे थे। मिलिट्री ने रोककर हमें श्रीनगर से जम्मू ले जाकर छोड़ा। वहाँ से दिल्ली लौटकर तत्कालीन प्रधानमंत्री को झंडा सौंपा गया। निवेदन किया गया कि प्रधानमंत्री उस झंडे को लाल चौक पर लगवाएं। 1992 में भाजपा नेता मुरलीमनोज जोशी व नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार श्रीनगर के लाल चौक में झंडा फहराया गया। फडणवीस ने कहा-मैं आंदोलनों में सहभागी होते रहा। 20 वर्ष की उम्र में रामजन्मभूमि आंदोलन शामिल होकर पहली बार देखा की गोलियां कैसे चलती है। उस समय 18 दिन तक बदार्पूर्य की जेल में रहा। 1992 में बाबरी ढहते समय भी आंदोलन में सहभागी रहा।
कोई भी बन सकता है मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री बनने के तरीके से जुड़े सवाल पर फडणवीस ने कहा-हिंदी फिल्म में अनिल कपूर एक दिन के नायक, मुख्यमंत्री बन जाते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री बनना इतना आसान नहीं है। देश की संविधान व लोकतंत्र की खूबी है कि जिस देवेंद्र फडणवीस ने नगरसेवक बनना भी नहीं सोचा था वह मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच गया। गुजरात के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचनेवाला देश का प्रधानमंत्री बन गया। यह भारत के संविधान, लोकतंत्र और युवाशक्ति की ताकत है।
मुख्यमंत्री पद तक की मेरी जो जर्नी अर्थात यात्रा है वह मैंने सोची भी नहीं थी। विचारों से प्रेरित होकर राजनीति में आया। जिस विचार व दल के साथ काम करता था लगता नहीं था कि कभी सत्ता भी आएगी। लगता था, विपक्ष की राजनीति करने के लिए पैदा हुए हैं, और रोज आंदोलन करते थे। रोज लड़ाई लड़ते थे लेकिन पता नहीं, जनता ने विश्वास दिखाया और सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते एक दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का दायित्व मिल गया। दावे के साथ कह सकता हूँ कि कोई भी व्यक्ति ठान ने तो मुख्यमंत्री बन सकता है।
युवाओं ने ली नशामुक्त की शपथ
युवाओं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई। सीपी विश्वास नांगे पाटिल ने युवाओं को अमली पदार्थों से दूर रहने, इनके इस्तेमाल और बिक्री को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं करने तथा नशामुक्त युवा पीढ़ी तैयार करने में सक्रिय भागीदारी की शपथ दिलाई। कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन रितेश गांवडे के स्वागत भाषण से हुई।
उम्मीदें रखते समय, त्याग और संघर्ष देखें : तिलक वर्मा
तिलक वर्मा ने कहा क्रिकेटरों से बहुत उम्मीदें जुड़ी होती हैं। भारत एक बहुत बड़ा देश और इसके नागरिकों की उम्मीदें भी उतनी ही ऊंची होती हैं। हर मैच जीतने के उद्देश्य से खेला जाता है हर भारतीय की यही उम्मीद होती है। हालांकि, क्रिकेट को आसान समझने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है इसके पीछे की मेहनत को देखना। खिलाड़ी नियमित अभ्यास, कई चीजों से दूर रहकर और बड़े-बड़े त्याग करके ही तैयार होते हैं। इसलिए, उम्मीदें रखते समय, इसके पीछे के त्याग और संघर्ष को समझना चाहिए।












