भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने PM मोदी और शहबाज को लिखा खत
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को सुधारने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और पाक पीएम शहबाज शरीफ को चिट्ठी लिखी है। इसमें कहा गया है कि टकराव नहीं, बातचीत का रास्ता चुनिए, ताकि दक्षिण एशिया में शांति और विकास का माहौल बन सके। आगे कहा कि यह दोनों देशों के लाखों युवाओं को अवसरों, समृद्धि और एक सुरक्षित भविष्य से वंचित कर रही है। उन्होंने पूर्ण राजनयिक संबंधों की बहाली और भारत और पाकिस्तान में उच्चायुक्तों की पुनः नियुक्ति के साथ-साथ दोनों देशों के नागरिकों के लिए सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करने की मांग की।
इन 117 हस्तियों में पूर्व अधिकारी, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 61 लोगों और पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत 56 लोगों ने चिट्ठी पर साइन किए हैं। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब हाल के महीनों में भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव बना हुआ है। इनका कहना है कि लगातार बढ़ती शत्रुता से दोनों देशों के विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
दोनों देशों को टकराव के बजाय शांति का रास्ता चुनना चाहिए। पत्र में कहा गया, भारत और पाकिस्तान की आबादी दुनिया की आबादी का एक पांचवां हिस्सा हैं। दोनों देशों की आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवा है। दोनों देशों के लोग निरंतर अविश्वास और टकराव के बजाय शांति, विकास, संपर्क और सहयोग से भविष्य के हकदार हैं। आगे कहा, दशकों के अलगाव ने हमारी सामूहिक क्षमता को बाधित किया है और इसके फलस्वरूप सामाजिक, आर्थिक और मानवीय स्तर पर भारी नुकसान हुआ है। हमारा मानना है कि निरंतर जुड़ाव और संवाद ही मतभेदों को सुलझाने और एक स्थिर एवं समृद्ध क्षेत्र का एकमात्र सही रास्ता है। इस समूह ने पीएम मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से इस संबंध में विभिन्न विश्वास बढ़ाने के उपायों पर विचार करने का आग्रह किया, जैसे कि पूर्ण राजनयिक संबंधों की बहाली और नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की पुनः नियुक्ति के साथ-साथ दोनों देशों के नागरिकों के लिए वीजा सर्विस को फिर से शुरू करना।
कई अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय संवाद करने का आह्वान
पत्र में जम्मू-कश्मीर पर चर्चा समेत सभी लंबित मुद्दों पर एक व्यापक द्विपक्षीय संवाद को फिर से शुरू करने का भी आह्वान किया, जिसमें 2004 से 2007 के बीच बातचीत से तैयार किए गए ढांचे पर पुनर्विचार करना, विसैन्यीकरण की दिशा में कदम उठाना और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए तनाव कम करना शामिल हैं। अटारी-वाघा बॉर्डर को व्यापार और यात्रा के लिए पूरी तरह से खोलने, श्रीनगर-मुजफ्फरबाद बस सर्विस को फिर से शुरू करने और अन्य कनेक्टिविटी पहलों के सुझावों के अलावा, उन्होंने यात्रा के समय और लागत को कम करने और कनेक्टिविटी में सुधार के लिए कमर्शियल एयरलाइनों के लिए एयर स्पेस को फिर से खोलने का भी आह्वान किया। (पेज 6 पर)
जनता की बात सुनें
पत्र में आगे कहा गया, हम आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हैं कि आप आम जनता की दिल की बातों को सुनें और अलगाव की जगह सहभागिता, शत्रुता की जगह संवाद और टकराव की जगह सहयोग को चुनें। दक्षिण एशिया का भविष्य विभाजन और संघर्ष से नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और साझा प्रगति से आगे बढ़ना चाहिए।












