नयी दिल्ली। भारत में प्रौद्योगिकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पिछले तीन वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। यूजीसी शिक्षा मंच ‘कॉलेज विद्या’ की बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में केवल 4 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी थी, जो 2025 में बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), त्वरित इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और डेटा विज्ञान जैसे उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी सबसे तेज़ी से बढ़ रही है।
विशेष रूप से एआई और एमएल प्रोग्रामों में महिलाओं की संख्या चार गुना बढ़कर 2025 में 20 प्रतिशत हो गई, जबकि 2024 में यह केवल 5 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया, “आज हर पांच छात्रों में से एक महिला एआई और एमएल मास्टर प्रोग्राम में शामिल है, जबकि पिछले वर्ष यह अनुपात केवल 20 में से एक था। पिछले दो वर्षों में एआई कार्यक्रमों की कुल मांग में 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और महिलाएं इस विकास चरण में प्रमुख योगदानकर्ता बन रही हैं।”
इसके अलावा, एमसीए साइबर सुरक्षा प्रोग्राम में एक-चौथाई छात्राएं हैं और जनरेटिव एआई में डॉक्टरेट उम्मीदवारों में 15 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
कॉलेज विद्या के मुख्य परिचालन अधिकारी रोहित गुप्ता ने कहा, “ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सांस्कृतिक बदलाव और ऑनलाइन शिक्षण मॉडल महिलाओं के लिए नए रास्ते खोल रहे हैं, जो भारत के तकनीकी भविष्य को आकार देंगे।”
रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं तकनीकी शिक्षा के अग्रिम मोर्चों पर अब निर्णायक भूमिका निभा रही हैं, और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में उनकी भागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है।











