दीदी को 3 बड़े झटके : 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया
ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना, स्पीकर की भी मंजूरी
लोकवाहिनी, संवाददाता
कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही टीएमसी की मुसीबतें बढ़ने लगी हैं। कभी साये की तरह साथ रहने वाले अपने ही नेता अब ममता से किनारा कर रहे हैं। बुधवार को टीएमसी को 3 बड़े झटके लगे। एक ओर तृणमूल कांग्रेस 2 हिस्सों में बंट गई। 28 साल के इतिहास में पहली बार औपचारिक तौर पर विभाजन हो गया। बुधवार को 58 बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र सौंपा। तो दूसरी ओर टीचर भर्ती घोटाले में ईडी की टीम अभिषेक बनर्जी के घर जांच करने पहुंची। उन्हें 15 जून को तलब किया है। वहीं तीसरा झटका फिरहाद हकीम ने दिया। उन्होंने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है।
विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को सौंपे गए समर्थन पत्र में मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। जानकारी के मुताबिक, स्पीकर ने मंजूरी दे दी है। उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष का रूम भी अलॉट कर दिया गया है। जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता जबकि अबरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है। ऋतब्रत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दो और विधायक हमारे साथ हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी विधानसभा स्पीकर और ममता बनर्जी का कोई बयान नहीं आया है। ममता के पास अब 22 विधायकों का समर्थन है। टीएमसी ने 294 सीटों में से 80 सीटें जीती थीं। इसी बीच सीनियर लीडर कुणाल घोष ने बताया कि फिरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता विपक्ष के चयन से जुड़े प्रस्ताव पर फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बागी गुट ने अपने पत्र में ममता बनर्जी को अब भी पार्टी अध्यक्ष बताया है। लेकिन अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व और विधायक दल से जुड़े फैसलों को मानने से इनकार किया है। अभिषेक बनर्जी से हमारी पार्टी और जनता का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। अगर संबंध होता तो वे 26 दिनों तक छिपे नहीं रहते बल्कि बाहर आते। (पेज 6 पर)
ममता ने पार्टी कमेटियां भंग कीं
पार्टी के भीतर बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी अब पूरे संगठन का पुनर्गठन करेगी।
अभिषेक बनर्जी से टीचर भर्ती घोटाले के मामले में होगी पूछताछ
विधानसभा में हुए कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद में राज्य सीआईडी द्वारा आगामी सोमवार को तलब किए जाने के झटके के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ अपना शिकंजा और कस दिया है। करोड़ों रुपये के बहुचर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में पूछताछ के लिए ईडी के अधिकारियों की एक टीम सीधे समन थमाने अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर जा पहुंची। अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति में उनके आवास पर मौजूद एक आधिकारिक प्रतिनिधि ने ईडी के उस कानूनी समन को स्वीकार किया। सूत्रों के अनुसार, इस नए समन में अभिषेक बनर्जी को अगले सप्ताह दिल्ली या कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।













