भाजपा से 10, कांग्रेस से 4 चुने गए, जीतने वालों में मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा शामिल
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव में 14 उम्मीदवार गुरुवार को निर्विरोध जीत दर्ज की। इनके सामने कोई और उम्मीदवार खड़ा नहीं था। इनमें 10 भाजपा और 4 कांग्रेस से हैं। चुनाव जीतने वालों में कर्नाटक से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मीडिया व प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा और भाजपा के एम. नागराज शामिल हैं। कर्नाटक से राज्यसभा के चार मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें भाजपा के इरन्ना कडाडी और नारायण कोरागाप्पा, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे तथा जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच.डी. देवेगौड़ा शामिल हैं। ये चारों सीट खाली होने के कारण चुनाव की घोषणा की गई थी। गुरुवार को सभी चार उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। वहीं, राजस्थान से भाजपा के सतीश पूनिया, अलका गुर्जर और कांग्रेस के नीरज डांगी निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। इसके अलावा गुजरात से भाजपा के सभी चार राज्यसभा उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है। वहीं, मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने चुनाव परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्वाचित हो गए हैं। भाजपा के तीनों उम्मीदवार यहां मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी से जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। बाद में तीनों नेताओं ने मीडिया के समक्ष निर्वाचन प्रमाण पत्र प्रदर्शित किए।
नटराजन को राहत नहीं, आज फिर सुनवाई
मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बीजेपी की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन रद्द होने के बाद अब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नामांकन रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। लेकिन उनको तत्काल कोर्ट की ओर से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट कल यानी शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हुआ है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने गुरुवार को जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंद्रकर की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख (मेंशन) किया। सिंघवी ने इसे बेहद जरूरी मामला बताते हुए कोर्ट से जल्द सुनवाई करने या एक पंक्ति का अंतरिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया। दलीलों को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (लिस्ट) कर दिया।
कोर्ट में सिंघवी ने दावा किया कि रिटर्निंग ऑफिसर (चुनाव अधिकारी) ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र गलत तरीके से खारिज किया है। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले का खुलासा नहीं किया। सिंघवी ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ केवल समन जारी किया गया था, कोर्ट ने मामले का संज्ञान तक नहीं लिया था। इसके बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। दरअसल, यह कानूनी कार्रवाई रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा भाजपा की आपत्तियों के कारण नटराजन के नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने के बाद की गई है। सत्तारूढ़ पार्टी ने दावा किया कि कांग्रेस नेता ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दिए गए हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक कानूनी मामले की जानकारी नहीं दी थी। जबकि कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन ने इसे सरकार के इशारे पर की गई राजनीतिक साजिश और पूरी तरह से गैरकानूनी बताया है। मीनाक्षी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं है और यह मुद्दा केवल एक निजी शिकायत से संबंधित था।












