गोंदिया में शिक्षा बचाओ आंदोलन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
लोकवार्हनी संवाददाता
गोंदिया। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा और लोकतांत्रिक संवाद की मांग को लेकर सोमवार को गोंदिया में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक पर शिक्षा बचाओ समन्वय समिति, विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित आंदोलन में आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के समर्थन में आवाज बुलंद की गई। साथ ही नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे संकट पर केंद्र सरकार से गंभीरता से ध्यान देने की मांग की। आंदोलन में गोंदिया नगर परिषद के अध्यक्ष सचिन शेंडे, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के जिलाध्यक्ष पंकज यादव, नगरसेवक सुनील भालेराव, हरीश तुलसकर, योगेश अग्रवाल, आंदोलन समिति के अतुल सददेवे सहित संविधान मित्र संगठनों के पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की आधारशिला है। आंदोलन की विशेषता यह रही कि मुख्य मंच पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना को सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया था। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा और विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा की मांग वाले तख्तियां थीं। नारेबाजों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग उठाई। प्रदर्शन को प्रभावी बनाने के लिए आंदोलनकारियों ने प्रशासन की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेदों का सम्मान होना चाहिए तथा संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के व्यापक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता बताई। हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। आंदोलन के बाद उपविभागीय अधिकारी चंद्रभान खंडाईत के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, केंद्र सरकार द्वारा उनके प्रतिनिधियों से तत्काल सकारात्मक संवाद शुरू करने, शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से निर्णय लेने तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति संवेदनशील और संविधानसम्मत रुख अपनाने की मांग की गई। आंदोलन के वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का भविष्य संवाद, संवेदनशीलता और विश्वास की मजबूत नींव पर ही सुरक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है।
गढ़चिरौली में युवाओं और सामाजिक संगठनों का धरना
गढ़चिरौली। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के आंदोलन के समर्थन में सोमवार को गढ़चिरौली के गांधी चौक पर युवाओं, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इस दौरान धरना प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। साथ ही आंदोलन के दौरान हुए कथित पुलिस कार्रवाई का विरोध भी दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीरें और विभिन्न मांगों से जुड़े बैनर लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, विद्यार्थियों की समस्याओं पर न्यायपूर्ण निर्णय और आंदोलनकारियों पर की गई कार्रवाई का विरोध सहित विभिन्न मांगें रखी गईं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच 18 जुलाई को सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद कुछ आंदोलनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी आंदोलन के समर्थन में 20 जुलाई को मुंबई में भी प्रदर्शन किए गए।
छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में खामगांव में मार्च
बुलढाणा। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन जबरन समाप्त करा जाने और दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में सोमवार को बुलढाणा जिले के खामगांव में विभिन्न सामाजिक, छात्र और राजनीतिक संगठनों ने विरोध मार्च निकालकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। लोकशाही संविधानवादी लोकतंत्र मंच, खामगांव, महाविकास आघाडी तथा कई सामाजिक, छात्र, किसान, मजदूर और संविधान समर्थक संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में यह आंदोलन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। आंदोलन की शुरुआत भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ और छात्रों के अधिकारों के समर्थन में नारे लगाते हुए रैली उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) कार्यालय तक पहुंची। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘शिक्षा मंत्री होश में आओ’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति, नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों की आलोचना की। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। मार्च समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उपविभागीय अधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। सभा में मौजूद विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संविधान, लोकतंत्र और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए संयुक्त रूप से संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी दोहराया।
भंडारा में युवाओं का प्रदर्शन
भंडारा। देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), भंडारा की ओर से 20 जुलाई को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने तीव्र आंदोलन किया गया। इस आंदोलन में जिले के 500 से अधिक युवक-युवतियों ने उत्स्फूर्त भागीदारी की। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। आंदोलनकारियों ने मांग की कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को तत्काल रोका जाए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस गंभीर मामले की जिम्मेदारी लेने की मांग की गई। इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की कथित गिरफ्तारी का विरोध किया। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
विभिन्न संगठनों ने दिया समर्थन : इस आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिला। आम आदमी पार्टी, आजाद समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), ओबीसी संघर्ष समिति और एम्प्लॉइज सेना के प्रतिनिधियों ने उपस्थित रहकर आंदोलन को समर्थन किया। आंदोलन का नेतृत्व अर्पण गोस्वामी, पायल सतदेव, शांतनु गन्ने, सुरेश खंगार, दीपक जनबंधु, मृणाल गोस्वामी, मुकुंद साखरकर, हिमांशु मंडे, अलका वासणिक, माधुरी खोब्रागड़े, वैशाली रामटेके, हेमा गजभिये, प्रमोद केसलकर और सुचिता मेश्राम सहित अन्य प्रमुख कार्यकर्ताओं ने किया। आंदोलन में भंडारा शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की कि पेपर लीक मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई कर दोषियों को जल्द सजा दी जाए और विद्यार्थियों का विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक व्यापक किया जाएगा।











