जांच समिति बोली- सबूतों से छेड़छाड़ हुई, नोटों की बोरी कहां से आई, नहीं बता पाए
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से नकदी बरामद होने के मामले में लोकसभा द्वारा गठित जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित पाया है और कहा कि वह संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई। न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर नोटों की अधजली गड्डियां मिलने के मामले में उन्हें पद से हटाने की कार्यवाही शुरू की गई थी। समिति ने कहा है कि न्यायमूर्ति वर्मा अपने आवास के स्टोर रूम में मिली नकदी और उसके स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे। जांच समिति के अनुसार, न्यायमूर्ति वर्मा का स्पष्टीकरण ‘टालमटोल वाला और असंतोषजनक’ रहा। समिति ने कहा कि उनके स्पष्टीकरण में स्पष्टता, पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी का भाव नहीं दिखा।












