फरवरी 2027 तक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे, नोएल टाटा से मतभेद, ट्रस्ट में खींचतान बनी वजह
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ पुनर्नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक के शीर्ष पर उनका करीब एक दशक का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। टाटा समूह में 40 साल बिता चुके चंद्रशेखरन (63) ने बुधवार को कहा कि उन्होंने टाटा संस के निदेशक मंडल को सूचित कर दिया है कि 20 फरवरी, 2027 को उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे।
उन्होंने सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए निदेशक मंडल से जल्द उत्तराधिकारी तय करने को कहा है। यह फैसला टाटा संस में उनके बने रहने को लेकर कई महीनों से जारी अनिश्चितता के बाद आया है। टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख (होल्डिंग) कंपनी और समूह की कंपनियों की प्रवर्तक है। परोपकारी ट्रस्ट के पास टाटा संस की कुल 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिससे टाटा ट्रस्ट को समूह के संचालन में महत्वपूर्ण प्रभाव हासिल है। चंद्रशेखरन को आमतौर पर चंद्रा के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने की सिफारिश की थी। दोनों ट्रस्ट के पास मिलकर टाटा संस की 51.54 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि इसके बाद टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और निदेशक मंडल ने भी इस प्रस्ताव को दर्ज किया और इसकी सिफारिश की। यह प्रस्ताव 24 फरवरी को निदेशक मंडल की बैठक में रखा गया था, लेकिन एक निदेशक के समर्थन न करने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
प्रस्ताव का विरोध किसने किया, इसका नाम लिए बिना चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मति समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्होंने फैसला टालने का विकल्प चुना। छह महीने बाद भी कोई फैसला नहीं हो पाने के बीच उन्होंने कहा कि नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता अब असहनीय हो गई है क्योंकि टाटा संस कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं पर काम कर रही है, जो अहम चरण में हैं। गतिरोध को चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेदों से जोड़कर देखा गया है। रतन टाटा के निधन के बाद 2024 में नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन बने थे। खबरों के अनुसार, नोएल टाटा ने आश्वासन मांगा था कि टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा, जिस पर चंद्रशेखरन सहमत नहीं थे।












