सख्ती : यातायात ई-चालान की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का सुझाव
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यातायात ई-चालान के तहत जुर्माने के रूप में करीब 20,000 करोड़ रुपये की भारी बकाया राशि की वसूली करनी है और उसने वसूली के लिए ऐसे चालान को बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव दिया। इनमें बकाया चालान को बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव भी शामिल है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ सोमवार को एस. राजसीकरन बनाम भारत संघ मामले में ई-चालान और ट्रैफिक नियमों के इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि सिर्फ बड़ी संख्या में ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है।
असली सवाल इन चालानों पर लगाई गई जुर्माने की रकम की वसूली का है। अदालत ने सुझाव दिया कि अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं तो बकाया रकम को बिजली के बिल से जोड़ने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इससे बकाया चालान जमा कराने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं, तो इसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दें। उन्हें बिजली का बिल भरना होगा, नहीं तो बिजली की लाइन काट दी जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि करीब 14 वर्षों से दिए जा रहे निर्देशों का वास्तविक स्तर पर कितना पालन हुआ है। कोर्ट ने कहा कि अगर निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे और उनका पालन नहीं होगा तो आगे सख्त कदम उठाने की स्थिति आ सकती है।
7वीं-8वीं की तरह छठी में भी तीसरी भाषा पर राहत
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नई तीन-भाषा व्यवस्था के तहत छठी कक्षा के छात्रों को भी वही राहत देने का निर्देश दिया है, जो फिलहाल सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों को मिल रही है। नई व्यवस्था के तहत मौजूदा शैक्षणिक सत्र के छठी कक्षा के छात्रों को तीसरी भाषा पढ़नी होगी। हालांकि, जब ये छात्र दसवीं कक्षा में पहुंचेंगे, तो उन्हें उस तीसरी भाषा की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। फिलहाल यही छूट सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों को दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने छठी कक्षा के छात्रों को एक और राहत दी है। जो छात्र पहले से ही दो गैर-मातृ भाषाएं पढ़ रहे हैं, वे उसी भाषा संयोजन को जारी रख सकेंगे। उन्हें मौजूदा भाषाओं में से किसी एक को बदलने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे छात्र तीसरी भाषा के तौर पर एक अतिरिक्त भारतीय भाषा पढ़ सकेंगे। यानी उन्हें दो क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने के लिए अपनी पहले से पढ़ी जा रही किसी भाषा को हटाने की जरूरत नहीं होगी।














