चीनी राष्ट्रपति का गलवान झड़प के बाद पहला भारत दौरा, पीएम मोदी से बैठक संभव
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। विश्व में बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, भारत शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उपयोग आर्थिक विकास को गति देने के लिए कर रहा है। साथ ही, भारत ग्लोबल साउथ के विकास से जुड़ी मुख्य प्राथमिकताओं, विशेष रूप से खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा की वकालत भी कर रहा है। शिखर सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस बीच, चीन ने राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने भारत आने की पुष्टि कर दी है। सात साल के अंतराल के बाद यह भारत की उनकी पहली यात्रा होगी। शी जिनपिंग की भारत यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस दौरान ट्रेड, इनवेस्टमेंट और बिजनेस कोऑपरेशन बढ़ाने पर जोर रह सकता है।
भारत और चीन हाल के वर्षों में रिश्तों में आई नरमी को आगे बढ़ाते हुए आर्थिक और व्यावहारिक सहयोग के नए रास्ते तलाशना चाहते हैं। शी का यह दौरा, जो सात साल में उनका पहला भारत दौरा है, ऐसे समय में हो रहा है जब नई दिल्ली और बीजिंग हाई-लेवल जुड़ाव को मजबूत करने और प्रैक्टिकल सहयोग के एरिया को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और उनके इंडोनेशियाई समकक्ष प्रबोवो सुबियांतो उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जो राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। शीर्ष अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की मुख्य विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स समूह को एक अहम और पूरक मंच के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।












