भू-राजनीतिक मुद्दों के बीच खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा जोर
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा न्यूनीकरण और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में सामूहिक लचीलापन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे यह समूह खंडित भू-राजनीतिक माहौल में आगे बढ़ने के लिए एक प्रभावी आधार बन सके। नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार एवं शुल्क नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है।
इस अहम सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं। शिखर सम्मेलन में अब सिर्फ़ तीन दिन बचे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि समूह के सदस्य देश किसी संयुक्त बयान पर आम सहमति बना पाए हैं या नहीं, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूई) के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। यह समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है। मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात तथा सऊदी अरब शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ। बेलारूस, बॉलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने थे।












