आस्था : पंडालों में प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा
लोकवाहिनी, संवाददाता
पुणे। पुणे में सोमवार को हर्षोल्लास के साथ 11 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत हुई. इस मौके पर श्रद्धालुओं ने अपने प्रिय गजानन देवता का घरों, आवासीय सोसायटी और सार्वजनिक पंडालों में स्वागत किया. ‘गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयघोष के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पुणे के पांच मानाचे गणपति – कसबा गणपति, तांबड़ी जोगेश्वरी गणपति, गुरुजी तालीम, तुलसीबाग गणपति और केसरी वाड़ा गणपति की प्राणप्रतिष्ठा हुई. महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े शहर की सभी बस्तियों की सड़कों पर सुबह से ही मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी, जब ढोल-ताशे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ताल पर सुंदर ढंग से सजाई गई मूर्तियां पंडालों में ले जाई जा रही थीं.
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में फूलों से सजे रथ में प्रतिमा को मंडप तक ले जाया गया. इस साल मंडप की सजावट वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेम मंदिर से प्रेरित है. श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंडल में प्रसिद्ध शास्त्रीय बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने प्राणप्रतिष्ठा की, जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने आरती की. श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंडल के न्यासी पुनीत बालन ने कहा कि इस साल सजावट की थीम श्री गणेश स्वर्णधाम रखी गई है, जिसमें भगवान गणेश के दिव्य धाम को दर्शाया गया है.
केसरी वाड़ा में न्यासी रोहित तिलक ने कहा कि गणपति प्रतिमा का स्वागत पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ किया गया. तिलक ने कहा, अगले दस दिन तक मंडल की ओर से कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक पहल भी आयोजित की जाएंगी. हम विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों के व्याख्यान भी आयोजित कर रहे हैं.
गुरुजी तालीम मंडल में इस बार उत्सव का विशेष महत्व है, क्योंकि मंडल अपनी स्थापना के 140वें वर्ष का जश्न मना रहा है. उत्सव प्रमुख हार्दिक परदेशी ने बताया कि आगमन यात्रा की शुरुआत छह ढोल-ताशा और ध्वज दलों के प्रदर्शन के साथ हुई. इसके बाद अश्वराज, एक बैंड और ‘नगाड़ा’ दल ने प्रस्तुति दी. मंडल ने इस साल उत्सव की सजावट के तहत चार धाम तीर्थ स्थलों में शामिल जगन्नाथ पुरी मंदिर की प्रतिकृति तैयार की है. परदेशी ने कहा, गुरुजी तालीम मंडल गणेशोत्सव की शुरुआत 1887 में हुई थी. उस समय यह शहर की सबसे पुरानी तालीमों (पारंपरिक कुश्ती और शारीरिक प्रशिक्षण केंद्रों) में से एक थी.
कसबा गणपति मंडल में प्रथम पूजनीय गणपति की प्राणप्रतिष्ठा पारंपरिक माहौल के बीच संपन्न हुई. मंडल के अध्यक्ष श्रीकांत शेटे ने कहा, ‘कसबा गणपति मंदिर में सजावट सादगीपूर्ण रखी गई है, जिसमें प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया है. अगले 11 दिनों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने पर भी ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के मिलावट विरोधी अभियान के तहत मंडल खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर भी जागरूकता फैलाएगा.











