लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। यूपीआई शुल्क के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 14 और 15 सितंबर को जारी यूपीआई शुल्क गैजेट नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की गई है, जिनमें 2000 से ज्यादा के कमर्शियल यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने की घोषणा की गई थी। यह याचिका वकील अंजन दत्ता ने इस आधार पर दायर की है कि हाल ही में घोषित चार्ज का असर आखिरकार आम नागरिकों पर पड़ेगा। यह याचिका केंद्र सरकार, आरबीआई, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और यूपीआई के खिलाफ दायर की गई है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि भले ही इन चार्जेज को मामूली और यूपीआई प्लेटफॉर्म को बनाए रखने के लिए जरूरी बताया जा रहा हो। चाहे फीस सीधे प्लेटफॉर्म या मर्चेंट पर ही क्यों न लगाई जाए, आम जनता पर इसका असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने से कैश पेमेंट को बढ़ावा मिल सकता है। इससे मुश्किलें बढ़ सकती हैं। याचिका में केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जुड़ी संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से वित्त मंत्रालय द्वारा जारी दोनों नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है।
विपक्ष ने बताया जनविरोधी फैसला संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की बैठक में बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस जनविरोधी फैसले का असर पूरे देश पर होगा।















