सफलता: मीराबाई चानू ने रजत जीतकर एशियाई खेलों में पदक का सूखा खत्म किया
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागोया: भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को यहां महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर 28 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। यह 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के रजत पदक के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में भारत का पहला पदक है। एशियाई खेलों की अंक तालिका में भारत एक गोल्ड, 5 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज के साथ मेडल टैली के 13वें स्थान पर है। वहीं, चीन 47 गोल्ड मेडल के साथ पहले नंबर पर है। पदक जीतने के बाद मीराबाई ने कहा, एशियाई खेलों में पदक जीतना सपना सच होने जैसा है। मैं पिछले 12 वर्षों से, 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी। इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं।
उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैंपियन री सॉन्ग गम् ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 किलोग्राम और 121 किलोग्राम) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेलों में खिताबी हैट्रिक पूरी की। उन्होंने कुल वजन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रिविजयाना ने 191 किलोग्राम (88 किलोग्राम और 103 किलोग्राम) भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया। मीराबाई ने अभी तक ओलंपिक से लेकर विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीते थे लेकिन वह एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल कर नहीं पाई थीं। मीराबाई ने ओलंपिक में रजत पदक, विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक तथा राष्ट्रमंडल खेलों और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के अलावा एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता है।
मीराबाई ने 2014 में अपने पहले एशियाई खेलों में नौवां स्थान हासिल किया था। वह पीठ की चोट के कारण 2018 के एशियाई खेलों में भाग ले नहीं पाई थीं जबकि पिछले एशियाई खेलों में वह चौथे स्थान पर रही थीं। अपनी मां के उपहार में दिए गए ओलंपिक रिंग की तरह के सोने के झुमके पहने और बालों में तिरंगे का रिबन लगाए मीराबाई पदक जीतने के दृढ़ लक्ष्य के साथ मंच पर पहुंचीं। मीराबाई ने स्नैच में 83 किलोग्राम के साथ शुरुआत की और फिर अपने अगले दो प्रयासों में 85 किलोग्राम और 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाकर एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीता। रजत पदक पक्का होने के बाद उन्होंने अपना आखिरी प्रयास नहीं लिया।
उन्होंने कहा, “जब से मैंने भारोत्तोलन में कदम रखा तब से मेरा सपना एशियाई खेलों में पदक जीतना रहा है। एशियाई खेलों से पहले या उसके दौरान कुछ न कुछ होता रहा, लेकिन इस बार मैंने अपना सपना पूरा कर लिया.” मीराबाई यह पदक जीतने के लिए इतनी प्रतिबद्ध थीं कि पिछले महीने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अगले दिन बाद ही वह अभ्यास में लग गई थीं।
भारत को दिन का चौथा मेडल मिला
गेम्स के चौथे दिन भारत को चौथा मेडल मिला है। इनमें से 2 मेडल शॉटगन शूटिंग के स्कीट टीम इवेंट में आए। राजजा ढिल्लो, परिनाज धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की महिला टीम 331 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रही। पुरुष इवेंट में अनंतजीत सिंह नरुका, मेराज अहमद खान और भवतेश सिंह गिल ने शूट-ऑफ में कजाकिस्तान को हराकर ब्रॉन्ज जीता। एक मेडल सॉफ्ट टेनिस में जय मीना ने दिलाया।














