नागोया: भारत के लिए एशियाई खेलों की निशानेबाजी रेंज में जिस दिन से काफी उम्मीदें लगी हुई थीं, वह दिन बहुत कम उपलब्धियों के साथ खत्म हुआ। महिला 10 मीटर एयर पिस्तौल की स्टार निशानेबाजों की तिकड़ी उम्मीदों को पदक में बदलने में नाकाम रही, हालांकि पुरुष और महिला स्कीट टीम ने बुधवार को कांस्य पदक जीतकर कुछ हद तक भारत की प्रतिष्ठा बचाई। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर, ईशा सिंह और सुरुचि इंद्र सिंह तीनों दुनिया की शीर्ष निशानेबाजों में शुमार हैं। निशानेबाजी में इन तीनों से भारत को पदक की सबसे ज्यादा उम्मीदें थीं। लेकिन ईशा और सुरुचि फाइनल में जगह बनाने में असफल रहीं जबकि क्वालिफिकेशन दौर से आगे बढ़ने वाली एकमात्र भारतीय मनु भी उम्मीदों के भारी दबाव के बीच संघर्ष करती नजर आईं और पांचवें स्थान पर रहीं। पुरुष और महिला स्कीट स्पर्धाओं में मिले दो कांस्य पैसों के साथ भारत के निशानेबाजी में कुल पदकों की संख्या सात हो गई जिसमें चार रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। हालांकि इस दिन को जीते गए पदकों से अधिक उन मौकों के लिए याद किया जाएगा जो भारत के हाथ से निकल गए।
ईशा क्वालिफिकेशन में 572 अंक से 15वें स्थान पर रहीं जो उनके स्तर की निशानेबाज से अपेक्षित प्रदर्शन से काफी कम था। वहीं कई विश्व कप स्वर्ण पदक जीत चुकीं सुरुचि ने 568 अंक हासिल किए और आठ निशानेबाजों वाले फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। इन दोनों के शुरुआती दौर में बाहर होने के बाद भारत की पदक की उम्मीदों का पूरा भार अकेले मनु के कंधों पर आ गया। पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वाली मनु ने क्वालिफिकेशन में 579 का स्कोर बनाकर तीसरा स्थान हासिल किया लेकिन फाइनल में वह 181.1 अंक ही बना पाईं।
यह 24 वर्षीय खिलाड़ी अब 25 मीटर एयर पिस्तौल में भाग लेगी। टीम स्पर्धा ने एक बार फिर यह कड़वी याद दिलाई कि निशानेबाजी में जीत और हार के बीच का अंतर कितना मामूली हो सकता है। भारत इस स्पर्धा में वियतनाम से पदक से चूक गया। दोनों टीमों के समान 1719 अंक रहे लेकिन भारत ने 10 अंक पर कम शॉट लगाए जिससे उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ रहा। इतनी मजबूत व्यक्तिगत निशानेबाजी क्षमता के साथ आई भारतीय टीम के लिए टीम स्पर्धा में चौथा स्थान निश्चित रूप से अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम नहीं था। यह 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले एशियाई के प्रदर्शन से भी बिल्कुल उलट था। वहां भारत ने व्यक्तिगत स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला और दूसरा स्थान हासिल किया था। पलक गुलिया ने स्वर्ण पदक जबकि ईशा ने रजत पदक अपने नाम किया था। भारत ने टीम स्पर्धा में भी रजत पदक जीता था। इस अंतर को नजरअंदाज करना मुश्किल है और इससे भारत की निशानेबाजी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठना स्वाभाविक है जिसमें तैयारी और कोचिंग से लेकर खिलाड़ियों के चयन की नीतियां तक शामिल हैं।
हाल के समय में भारत ने अपने एशियाई खेलों के दलों से ऐसे निशानेबाजों को बाहर रखा है जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार रिकॉर्ड रहा है। इन फैसलों के बाद बार-बार यह सवाल उठता रहा है कि क्या घरेलू चयन मानदंड अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और मौजूदा फॉर्म को पर्याप्त महत्व दे रहे हैं। ईशा और सुरुचि ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर ज्यादा चर्चा नहीं की कि आखिर क्या गलत हुआ। हालांकि, मनु स्पष्ट रूप से निराश नजर आईं और उन्होंने अपने प्रदर्शन के पीछे मौजूद व्यक्तिगत चुनौतियों की एक झलक साझा की।















