नागपुर। दीपावली और छठ महापर्व पर घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने इस बार दोहरी परेशानी है। नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है, तो हवाई सफर का किराया आम दिनों के मुकाबले तीन से चार गुना तक महंगा हो गया है। नागपुर से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ लौटने वाले गैरतपेसा (उत्तर प्रदेश/बिहार आदि) लोगों और विद्यार्थियों को टिकट के लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। वहीं, छठ पर बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए भी कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग और कुछ तारीखों पर टिकट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति है। ऐसे में त्योहार पर परिवार के साथ समय बिताने की चाह रखने वाले यात्रियों को सफर की योजना पहले से बनानी पड़ रही है। महानगरों में नौकरी व पढ़ाई कर रहे प्रवासियों अपने घर लौटने के लिए बेताब हैं। हालांकि, ऐन वक्त पर टिकट बुक कराने की कोशिश कर रहे यात्रियों के सामने कंफर्म सीट का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की स्लीपर और इकोनॉमी श्रेणी में ऑनलाइन बुकिंग लगभग बंद हो चुकी है। त्योहार की तारीख नजदीक आने के साथ ही घर जाने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में जिन यात्रियों ने पहले से बुकिंग नहीं कराई थी, वे काफी परेशान नजर आ रहे हैं।
झारखंड संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12826) में 4, 7, 11 और 14 नवंबर को स्लीपर श्रेणी में 100 से अधिक तथा थर्ड एसी में 86 तक वेटिंग बताई गई है। आनंद विहार-पुरुलिया एक्सप्रेस (14022) में भी नवंबर की चुनिंदा तारीखों पर थर्ड एसी में करीब 90 और स्लीपर में 70 से अधिक वेटिंग है। बेंगलुरु से आने वाली ट्रेनों में भी यात्रियों को राहत नहीं मिल रही है। बेंगलुरु-हटिया एक्सप्रेस (12836) में कुछ तारीखों पर थर्ड एसी में 125 तक और स्लीपर में 100 से अधिक वेटिंग है। बेंगलुरु-हटिया की दूसरी नियमित ट्रेन (18638) में भी नवंबर की कई तारीखों पर लंबी वेटिंग की स्थिति बताई गई है। मुंबई से हटिया आने वाली लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस (12811) में भी कई तारीखों पर सभी श्रेणियों में सीटें फुल हैं।
तत्काल का ही सहारा
नागपुर सहित महानगरों में रहने वाले प्रवासियों के पास अब मुख्य रूप से तत्काल टिकट या अन्य वैकल्पिक साधनों का ही सहारा बना है। परिवार के साथ पर्व मनाने को चाहत रखने वाले लोग तत्काल कोटे पर उम्मीदें टिकाए बैठे हैं। हालांकि, तत्काल में सीटें सीमित होने के कारण टिकट कंफर्म होने की कोई गारंटी नहीं होती है, जिससे यात्रियों की चिंता और अधिक बढ़ गई है।
स्पेशल ट्रेनों की आस
हर साल त्योहारी सीजन में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए यात्रियों को रेलवे से बड़ी उम्मीदें हैं। लोग लगातार नई स्पेशल ट्रेनों के परिचालन शुरू करने की मांग कर रहे हैं। रेलवे की ओर से अतिरिक्त ट्रेनों की घोषणा होने पर ही दिल्ली और अन्य महानगरों से लौटने वाले प्रवासियों को वास्तविक राहत मिल सकेगी। फिलहाल यात्रियों की नजरें रेलवे के अगले आधिकारिक फैसलों पर टिकी हैं।
बिहार जाने वाली ट्रेनों में भी दबाव छठ महापर्व के दौरान 9 से 12 नवंबर के बीच बिहार जाने वाली ट्रेनों में भी सीटों की मांग बढ़ी है। मौर्य एक्सप्रेस (15027), हटिया-इस्लामपुर एक्सप्रेस (18624) और पाटलिपुत्र एक्सप्रेस (18622) में अलग-अलग श्रेणियों में लंबी वेटिंग बताई गई है। कुछ तारीखों पर रिकेट की स्थिति भी है। रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस में 11 और 12 नवंबर को सीटों की उपलब्धता सीमित बताई गई है, जबकि रांची-गोड्डा एक्सप्रेस में 7, 10 और 12 नवंबर को भी वेटिंग है। ट्रेनों में कंफर्म टिकट की मुश्किल के बीच यात्रियों के पास वैकल्पिक साधन के रूप में हवाई सफर का विकल्प है, लेकिन यहां भी किराये ने परेशानी बढ़ा दी है।
हवाई किराया तीन से चार गुना तक महंगा
एयरपोर्ट से आने-जाने वाली उड़ानों में त्योहार के दौरान यात्रियों की मांग बढ़ने के साथ किराये में उछाल आया है। नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह के लिए उपलब्ध कराए गए अनुमानित किराये के अनुसार, दिल्ली से रांची का टिकट सामान्य दिनों में करीब 5,000 से 6,000 रुपये में मिलती है। त्योहार के आसपास इसका किराया 10,714 से 18,000 रुपये से अधिक तक पहुंच गया है।













