महापौर तेजवाणी ने मौके पर पकड़ा मामला
लोकवाहिनी संवाददाता
अमरावती। शहर में गंदगी और नालों की सफाई का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। नालों में पहले से बड़ी मात्रा में कचरा जमा है, वहीं अब अस्पताल का जैव-चिकित्सकीय कचरा सीधे नाले में फेंके जाने का चौकाने वाला मामला सामने आया है। खास बात यह है कि रविवार को अचानक निरीक्षण के दौरान महापौर श्रीचंद तेजवाणी ने खुद इस मामले को देखा और संबंधित लोगों को तुरंत रोक दिया। उन्होंने संबंधित अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, महापौर राजापेठ से राजकमल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अंबापेठ वार्ड के नमूना क्षेत्र में नाले के पास एक कटला रिक्शा से अस्पताल का जैव-चिकित्सकीय कचरा नाले में फेंका जा रहा था। यह देखते ही महापौर ने अपना वाहन रुकवाया और संबंधित लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह कचरा पास स्थित होप हॉस्पिटल का था। महापौर ने तत्काल जैव-चिकित्सकीय कचरा नाले में डालने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने राजापेठ जोन के सहायक आयुक्त भूषण पुस्तकर और अंबापेठ वार्ड के स्वास्थ्य निरीक्षक को मौके पर बुलाया। अस्पताल के संचालक को भी घटनास्थल पर बुलाकर कचरा नाले में डालने का कारण पूछा गया। हालांकि, अस्पताल संचालक की ओर से इस संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की बात सामने आईइसके बाद महापौर श्रीचंद तेजवाणी से संबंधित अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के आदेश दिए। इस दौरान स्वीकृत नगरसेवक एडवोकेट प्रशांत देशपांडे सहित नगर निगम के अधिकारी मौजूद थे।
जिस नाले में कचरा डाला जा रहा था, वह पहले से ही गंदगी से भरा
कार्रवाई के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था की एक और तस्वीर सामने आई। जिस नाले में अस्पताल का जैव-चिकित्सकीय कचरा फेंकने का प्रयास किया जा रहा था, वह नाला खुद ही बड़ी मात्रा में कचरे से भरा हुआ था। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस नाले की कई महीनों से सफाई नहीं हुई है। शहर में समय पर कचरा नहीं उठाए जाने, नालियों की नियमित सफाई नहीं होने और कई स्थानों पर नागरिकों द्वारा सार्वजनिक जगहों पर कचरा फेंके जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इन मुद्दों पर नगर निगम की आमसभा में भी पहले कई बार चर्चा हो चुकी है।
महापौर ने नागरिकों से अपील की है कि वे शहर में कहीं भी कचरा न फेंकें और नगर निगम प्रशासन का सहयोग करें। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि अस्पताल द्वारा जैव-चिकित्सकीय कचरा नाले में डालना गंभीर मामला है और ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही नगर निगम को अपने अधीन आने वाले नालों की नियमित सफाई भी सुनिश्चित करनी चाहिए। अब संबंधित अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कब होती है और नमूना क्षेत्र में महीनों से कचरे से भरे नाले की सफाई नगर निगम कितने समय में करता है, इस पर नागरिकों की नजर बनी हुई है।













