लोकसभा स्पीकर को सौंपी चिट्ठी, ठाकरे ने बुलाई बैठक
लोकवाहिनी, संवाददाता:नई दिल्ली। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका लगा है। शिवसेना (उबाठा) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग अपना गुट बनाने का फैसला किया है। शिवसेना (उबाठा) के 6 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अलग समूह माना जाए। शिवसेना (उबाठा) के जिन सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखा है, उसमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। वहीं, शिवसेना (उबाठा) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के साथ खेला हो गया है। शिवसेना (उबाठा) के 9 में से 6 सांसदों ने बुधवार सुबह साढ़े 9 बजे स्पीकर को पत्र देकर एकनाथ शिंदे की पार्टी में विलय करने की मांग की है।
उद्धव के 6 सांसदों ने अपना गुट बनाकर शिवसेना में विलय कर दिया है। उद्धव की पार्टी के 6 बागी सांसद बुधवार सुबह नांदेड़, पुणे और मुंबई से प्राइवेट प्लेन से दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उनके साथ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के एक सीनियर नेता मौजूद थे, जिनके साथ दिल्ली आए और स्पीकर को अपने समर्थन का पत्र सौंपा है। उबाठा में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली में संजय राउत के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत और चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ मौजूद थे। इस तरह शिवसेना (उबाठा) के 9 में से 3 लोकसभा सांसद ही पहुंचे थे, 6 सांसद नहीं थे। इसके मतलब साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा बना हुई है। वहीं, शिवसेना (उबाठा) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा था कि सभी 9 सांसद हमारी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए हैं। उद्धव ठाकरे ने उन्हें जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया। हमने उन्हें जितना हो सका, संसाधन दिए। राउत ने कहा कि हमारे सांसद शिवसेना के चुनाव चिह्न मशाल पर चुने गए थे, जिसके नेता उद्धव ठाकरे हैं। वे पीएम मोदी के नाम पर नहीं जीते हैं। वे ऐसे में अगर अब कोई पाला बदलता है, तो हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, अगर जिन्हें जाना है, वो इस्तीफा देकर जा सकते हैं। इससे साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा टला नहीं है।
अरविंद सावंत ने स्पीकर से बागी गुट को मान्यता न देने की मांग की। इस बीच उबाठा सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि अलग होने वाले किसी भी संभावित गुट को पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में मान्यता न दी जाए। सावंत ने पत्र में कहा कि सदन में नेता, व्हिप और विधायी गतिविधियों से जुड़े अधिकार राजनीतिक दल से आते हैं, न कि केवल विधायक दल से। (पेज 6 पर)
■ संजय राउत ने दीं गालियां, विवाद
महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के लिए चुनौतियां बढ़ चुकी हैं। जब से शिवसेना (यूबीटी) में फूट की खबर सामने आई है, तब से तमाम तरह की बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी बीच सांसद संजय राउत के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। संजय राउत ने बागी सांसदों के लिए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन पर सवाल उठने लगे। बाद में जब उनसे इस पर सफाई मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि मराठी भाषा में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल आम बात है। एक रिपोर्टर के सवाल पर संजय राउत ने कहा, मैंने कोई आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है। मराठी में इस तरह की भाषा बोली जाती है। यह महाराष्ट्र की आम बोलचाल की भाषा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने आगे कहा, जिस भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, वही भाषा इस्तेमाल होनी चाहिए। सामने वाले को जो भाषा समझ आती है, उसी भाषा में बात करनी पड़ती है। मुझे पता है कि किस मौके पर कौन-सी भाषा का इस्तेमाल करना है। मैं ‘सामना’ का संपादक हूं और मुझे अपनी भाषा का पूरा ज्ञान है। संजय राउत यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, मैंने संसद में कभी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है। लेकिन अगर कोई बेईमानी करता है, तो उसके साथ क्या किया जाए? क्या उस पर फूल बरसाए जाएं? अगर कोई गद्दारी करता है, तो उसके बारे में क्या कहा जाए? क्या उसके स्वागत में फूलों की बारिश की जाए?











