10 सितंबर तक मूल विभाग लौटेंगे अफसर-कर्मचारी, मंत्रियों के दफ्तरों से होगी छुट्टी
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रतिनियुक्ति पर, सेवा उधार आधार पर या केवल मौखिक आदेशों के जरिये मंत्रियों के कार्यालयों और राज्य के विभागों में की गई अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है।
मंगलवार को जारी एक परिपत्र में मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि ऐसी सभी नियुक्तियां रद्द कर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 10 सितंबर तक उनके मूल कार्यालयों में वापस भेजा जाए। सरकार ने कहा कि इन नियुक्तियों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था और बड़ी संख्या में डॉक्टर, स्टेनोग्राफर, शिक्षक तथा इंजीनियर जैसे तकनीकी कर्मचारियों को भी मंत्रालय के कामकाज में लगाया गया था। इनमें से कई कर्मचारियों के पास मंत्रालयीन कार्य का आवश्यक प्रशिक्षण या अनुभव नहीं था, जिससे मंत्रालय के कामकाज और स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा था।
नहीं ली गई जरूरी मंजूरी
सरकार के मुताबिक, इन नियुक्तियों के लिए संबंधित मूल मंत्रालयीन विभाग, अतिरिक्त मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन/सेवाएं), मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। परिपत्र में कहा गया कि इस तरह
अतिरिक्त पद चाहिए तो मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी
सरकार ने कहा कि यदि किसी विभाग को अतिरिक्त स्वीकृत पदों की जरूरत है, तो पदों की संख्या बढ़ाने, उन्हें उच्चीकृत करने या ढांचे में बदलाव तथा वेतनमान बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजे जाएं। मंजूरी मिलने के बाद ही ऐसे पद निर्धारित प्रक्रिया के तहत भरे जाएंगे। नियमित मंत्रालयीन कैडर से बाहर के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव भी सामान्य प्रशासन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया से भेजने और मुख्यमंत्री की मंजूरी लेने के बाद ही लागू किए जा सकेंगे। खास तौर पर अधीनस्थ कार्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों को उधार के आधार पर या मौखिक आदेश से मंत्रियों के कार्यालयों में नियुक्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरे कार्यालयों में भेजे जाने से संबंधित विभागों में खाली पद भरना मुश्किल हो गया। इससे मूल विभागों के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ा और प्रशासनिक समस्याएं पैदा हुईं। साथ ही, कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में दिया गया प्रशिक्षण भी इस व्यवस्था के कारण प्रभावी रूप से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था।
संवेदनशील पदों पर तैनाती पर सवाल
सरकार ने यह भी चिंता जताई कि प्रतिनियुक्ति या मौखिक आदेशों के आधार पर की गई नियुक्तियों में ईमानदारी प्रमाणपत्र, चरित्र प्रमाणपत्र, गोपनीय रिपोर्ट, विभागीय जांच और सेवा से जुड़े अन्य रिकॉर्ड का जरूरी सत्यापन नहीं किया गया था। परिपत्र में कहा गया कि मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों का काम प्रशासनिक होने के साथ-साथ बेहद संवेदनशील प्रकृति का है, इसलिए ऐसे कर्मचारियों की पूरी पृष्ठभूमि और सेवा संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन जरूरी है। सरकार ने अप्रचलित या ‘डייंग कैडर’ घोषित किए जा चुके पदों से सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के
संविदा आधार पर कार्यकाल बढ़ाने को भी अनुचित बताया है।
15 सितंबर तक सौंपनी होगी रिपोर्ट
नए निर्देशों के तहत सभी कार्यालय प्रमुखों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को 15 सितंबर तक यह रिपोर्ट देनी होगी कि रद्द की गई नियुक्तियों वाले अधिकारी और कर्मचारी अपने मूल कार्यालयों में वापस पहुंच चुके हैं। यदि कोई कर्मचारी अपने मूल कार्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो संबंधित कार्यालय को उसका वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव को 20 सितंबर तक मुख्य सचिव कार्यालय में अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।
पहचान पत्र और फेस रिकग्निशन सुविधा भी बंद होगी
परिपत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि रद्द की गई नियुक्तियों से जुड़े पहचान पत्र, फेस रिकग्निशन और उपस्थिति दर्ज करने की सुविधाएं तत्काल बंद कर दी जाएं। सरकार ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की नियुक्तियां दोबारा किए जाने पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के तहत कार्यवाही की जा सकती है। मंत्रियों के कार्यालयों में भविष्य की सभी नियुक्तियां सामान्य प्रशासन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही करनी होंगी।













