प्रशांत महल्ले ने वापस लिया नामांकन
अमरावती। अमरावती स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार प्रशांत महल्ले ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। वहीं, नामांकन पत्र निरस्त होने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले विप्लव बाजोरिया को भी राहत नहीं मिली है। इसके बाद अब चुनावी मुकाबला महायुति के प्रवीण पोटे पाटिल, महाविकास आघाडी के हर्षजीत देशमुख और वंचित बहुजन आघाडी के नीलेश विश्वकर्मा के बीच त्रिकोणीय हो गया है।
इस सीट के लिए 18 जून को मतदान कराया जाएगा। शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता विप्लव बाजोरिया का नामांकन पत्र प्रशासन ने जांच के दौरान निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर कर चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। इसके चलते बाजोरिया इस चुनावी मुकाबले से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, बाजोरिया ने इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) और युवा स्वाभिमान के समर्थन से महायुति मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के मतों के आधार पर महायुति के पास स्पष्ट बढ़त मानी जा रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की महाविकास आघाडी की नजर अब छोटे दलों के मतों पर टिकी हुई है। करीब 25 ऐसे मतों को चुनाव में निर्णायक माना जा रहा है। इसके अलावा प्रहार जनशक्ति पार्टी के 21 तथा एआईएमआईएम के 16 मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ये वोट किस उम्मीदवार के पक्ष में जाते हैं, इस पर चुनाव परिणाम काफी हद तक निर्भर करेगा। अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महाविकास आघाडी के उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख, महायुति उम्मीदवार प्रवीण पोटे पाटिल को कितनी कड़ी चुनौती दे पाते हैं। 18 जून को होने वाले मतदान के बाद इस प्रतिष्ठित चुनाव का फैसला सामने आएगा।










